“सिंधी भाषा बचाना संस्कृति की रक्षा है” — विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने उदयपुर में सांस्कृतिक संध्या में दिया संदेश
नरेश गुनानी
जयपुर, 27 सितम्बर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भाषा ही संस्कृति की रीढ़ होती है और इसे संरक्षित करके ही संस्कृति बचाई जा सकती है। उन्होंने सिंधीभाषियों को अपनी भाषा और संस्कृति को संजोने की प्रेरणा दी। देवनानी ने यह बात उदयपुर में राजस्थान सिंधी अकादमी और झूलेलाल सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कही।

भाषाई संरक्षण और नई पीढ़ी
देवनानी ने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान के सिंध से आए सिंधीभाषियों को अपनी भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नई पीढ़ी को इस भाषा को आत्मसात करना चाहिए, ताकि सिंधी संस्कृति और सभ्यता जीवित रह सके। उन्होंने स्वयं को सिंधी बताते हुए गर्व व्यक्त किया और कहा कि सिंधी भाषा विश्व की समृद्ध भाषाओं में से एक है, जिसमें 52 वर्ण हैं, जो इसकी समृद्धता को दर्शाते हैं।

साहित्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
देवनानी ने सिंधी साहित्य की समृद्धि और साहित्य सृजन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में सिंधी गीत, नृत्य, संगीत और नाट्य मंचन की प्रस्तुतियां दी गईं। समाज की ओर से देवनानी का विशेष सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में हरीश राजानी, विजय आहुजा और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विभाजन और संस्कृति की गैलेरी
देवनानी ने बताया कि सिंधी समाज ने देश के बंटवारे का दंश झेला और खाली हाथ यहां आए। पाकिस्तान में हुए अत्याचारों और संघर्ष को दर्शाने वाली विभाजन विभीषिका गैलेरी अजमेर में बनाई जा रही है। इस गैलेरी में सिंधी समाज की भाषा, सभ्यता और संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।
सांस्कृतिक संध्या के इस आयोजन ने न केवल सिंधी भाषा और संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि नई पीढ़ी को इसे अपनाने और संरक्षित करने की प्रेरणा भी दी।

