सिंधी भाषा दिवस पर ऐतिहासिक पहल: उपराष्ट्रपति भवन में होगा भारतीय संविधान के सिंधी संस्करण का विमोचन

नरेश गुनानी 

जयपुर/नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026

​भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आगामी 10 अप्रैल को सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर भारतीय संविधान के सिंधी संस्करण का विमोचन किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले इस गरिमामय समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे।

समारोह का विवरण और निमंत्रण

​केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है। यह समारोह विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग, राजभाषा खंड (प्रादेशिक इकाई) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

  • दिनांक: 10 अप्रैल, 2026
  • समय: प्रातः 10:30 बजे
  • स्थान: 108, चर्च रोड स्थित वाइस प्रेसिडेंट एन्क्लेव, नई दिल्ली
  • मुख्य अतिथि: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

दो लिपियों में प्रकाशन

​भाषाई सुगमता और सिंधी समुदाय की विविधता को ध्यान में रखते हुए, भारत के संविधान का यह अनुवाद देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में प्रकाशित किया गया है। यह पहल उन लाखों लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो इन लिपियों के माध्यम से अपनी मातृभाषा से जुड़े हुए हैं।

विकसित भारत @ 2047 की ओर कदम

​विधि और न्याय मंत्रालय ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंत्रालय की प्राथमिकता है कि देश का प्रत्येक नागरिक अपनी स्थानीय भाषा में देश के सर्वोच्च कानून (संविधान) को समझ सके। इसी कड़ी में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में अनुवाद कार्य को गति दी जा रही है।

वासुदेव देवनानी ने जताया आभार

​इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा:

​”विभाजन का दंश झेलकर भारत आए लाखों सिंधी समुदाय के नागरिकों के लिए यह अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने का ऐतिहासिक क्षण है। अपनी भाषा में संविधान की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की समावेशी सोच का परिचायक है।”

 

​यह विमोचन न केवल सिंधी भाषा के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि संवैधानिक साक्षरता को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा।

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