सिंजारे पर महकी मेहंदी, घर-घर गूँजे गणगौर के गीत: अखंड सौभाग्य की कामना के साथ पूजे ईसर-गवरजा

सिंजारे पर महकी मेहंदी, घर-घर गूँजे गणगौर के गीत: अखंड सौभाग्य की कामना के साथ पूजे ईसर-गवरजा

| योगेश शर्मा

जयपुर। गुलाबी नगरी में लोक पर्व गणगौर की रंगत परवान पर है। अखंड सौभाग्य और सुखी दाम्पत्य जीवन का प्रतीक ‘सुहाग पर्व’ गणगौर पूजन के साथ ही घरों में उत्सव का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार को सिंजारे के अवसर पर महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाई और पारंपरिक ‘गुणा’ व शक्करपारे बनाकर माता गवरजा को अर्पित किए।

सिंजारे की रही धूम, ससुराल से आए उपहार

​नवविवाहिताओं के लिए सिंजारा विशेष उत्साह लेकर आया। पीहर और ससुराल, दोनों पक्षों से प्रेम के प्रतीक स्वरूप मिठाई, घेवर, कपड़े और शृंगार सामग्री भेजी गई। सुहागिन महिलाओं ने सज-धजकर गणगौर पूजन किया और सामूहिक रूप से मेहंदी लगाई। इस दौरान मिट्टी के ईसर-गणगौर की खरीदारी के लिए बाजारों में भी खासी रौनक देखी गई।

शिव-पार्वती के अटूट प्रेम का प्रतीक

​पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता गवरजा (पार्वती) होली के अगले दिन अपने पीहर आती हैं। आठ दिनों बाद भगवान शिव (ईसरजी) उन्हें लेने आते हैं और चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है।

  • पूजन विधि: चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से ही कुंवारी कन्याएं और सुहागिनें दूब और फूलों से ईसर-गणगौर का पूजन कर रही हैं।
  • परंपरा: सुहागिनें 8 गुणे और कुंवारी कन्याएं 16 गुणे माता को अर्पित करती हैं। उद्यापन करने वाली महिलाएं 16 सुहागिनों को भोजन कराकर उपहार भेंट करती हैं।

सांगानेर के महावीर नगर में गूँजे लोकगीत

​सांगानेर के महावीर नगर में आयोजित विशेष गणगौर पूजन समारोह में भक्ति और उल्लास का संगम देखने को मिला। लाल पारंपरिक परिधानों और राजस्थानी आभूषणों में सजी महिलाओं ने ईसर-गणगौर का विधिवत पूजन किया।

​”गोर-गोर गोमती, ईसर पूजै पार्वती…” और “गौर ए गणगौर माता खोल किवाड़ी…” जैसे पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।

 

​महिलाओं ने रोली, काजल और मेहंदी से माता का शृंगार किया और दूब से जल के छींटे देकर परिवार की खुशहाली की मंगल कामना की। इस अवसर पर ढोल-नगाड़ों के साथ गणगौर की सवारी भी निकाली गई।

समारोह में प्रमुख भागीदारी

​इस सामूहिक पूजन कार्यक्रम में स्थानीय निवासी इन्द्रा गुर्जर, संगीता शर्मा और पिंकी साहू सहित मुनिया राजपुरोहित, कमलेश गोयल, अंकिता छीपा, मीनू खंडेलवाल, मंजू गुर्जर, नीरू शर्मा, रिद्धि छीपा, छवि खंडेलवाल, चीकू शर्मा, सुनीता शर्मा, सृष्टि शर्मा, दक्षिता शर्मा, काव्य खंडेलवाल, हेजल सैनी, प्रेम दुसाद, सुमन देवी, भावना, परमेश्वरी, आशा, राजेश्वरी, राधा और आरती सैनी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व कन्याएं उपस्थित रहीं।

धार्मिक महत्व

​मान्यता है कि गणगौर का व्रत रखने से विवाहित महिलाओं के पति की आयु लंबी होती है और कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। यह पर्व राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और दाम्पत्य प्रेम की गहराई को दर्शाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सारंगढ़: सरकारी दफ्तर बना अखाड़ा; कृषि विभाग के REO ने पत्रकार और वकील से की मारपीट, CCTV में कैद हुई करतूत

गणपत चौहान / छत्तीसगढ़  ​सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के कृषि विभाग कार्यालय...

नेत्र चिकित्सा सेवा एक आध्यात्मिक साधना है: वासुदेव देवनानी

नरेश गुनानी  ​विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने किया 150वें नि:शुल्क...

धरोहरों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी: वासुदेव देवनानी

नरेश गुनानी  ​विश्व धरोहर दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने...