सिंजारा हुआ, तीज आज मनाई जाएगी – श्रावण के मंगलमय पर्वों में रंगी राजस्थान की रीतियां
By : सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 27,2025
(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर। श्रावण मास के शुभ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर शनिवार को सिंजारा पर्व पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। वहीं, रविवार को श्रावणी तीज का पर्व महिलाओं द्वारा विधिपूर्वक मनाया जाएगा। ये दोनों पर्व राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान हैं, जिनमें लोक परंपराओं, पारिवारिक बंधनों और धार्मिक आस्था का संगम देखने को मिलता है।
सिंजारे की रौनक – नवविवाहिताओं के घर पहुँचा मायरा
सिंजारा पर्व विशेष रूप से नवविवाहिताओं और सगाई हो चुकी कन्याओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। पंडितों के अनुसार, जिन कन्याओं का यह पहला श्रावण मास है, उन्हें उनके ससुराल से साड़ी, चूड़ियां, श्रृंगार-सामग्री, झूले, घेवर, फिणी और मिठाइयाँ आदि भेजी जाती हैं। इसे ‘सिंजारा’ कहा जाता है, जो सौभाग्य, स्नेह और स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
शहर की विभिन्न बस्तियों में शनिवार को सिंजारे की धूम रही। नवविवाहिताओं के घर मायरे के रूप में उपहार पहुँचे तो वहीं महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर, मेहंदी लगाकर, गीत गाते हुए झूला झूलने की रस्में निभाईं।
तीज का पर्व – शिव-पार्वती से जुड़ी पौराणिक मान्यता
श्रावणी तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठोर तप के बाद शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया था। अतः यह दिन विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पुत्र-पौत्र समृद्धि, और दाम्पत्य सुख की कामना हेतु विशेष होता है।
तीज पर महिलाएं व्रत रखती हैं, निर्जल उपवास करती हैं, पार्वतीजी की पूजा करती हैं और झूले झूलती हैं। अजमेर के मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजन और भजन संध्याएं आयोजित की जा रही हैं। कई स्थानों पर सुहागिनों ने पारंपरिक ‘तीज गीत’ गाते हुए उत्सव मनाने की तैयारियां की हैं।
लोकरीतियों से जुड़े मांगलिक कार्य भी होंगे सम्पन्न
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सिंजारा और तीज के शुभ संयोग पर सगाई, गोद भराई, नामकरण, रिंग सेरेमनी जैसे मांगलिक कार्य भी सम्पन्न किए जा सकते हैं। शनिवार-रविवार को शुभ मुहूर्त होने के कारण अनेक परिवारों ने इस अवसर को मांगलिक आयोजनों के लिए चुना है।
सांस्कृतिक पहचान बनाते ये त्योहार
राजस्थान में सिंजारा और तीज महज धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों की गर्मजोशी और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हैं। ये त्योहार मायके-ससुराल के रिश्तों में मिठास, नारी सम्मान, पारंपरिक वस्त्रों व भोजन की विरासत और लोककलाओं के संरक्षण की भी प्रेरणा देते हैं।
नारी शक्ति और परंपरा का सुंदर संगम
तीज-सिंजारा के माध्यम से स्त्रियों को सामाजिक मंच मिलता है, जहां वे अपने पारंपरिक परिधानों में लोकगीत, नृत्य और आपसी मेलजोल के जरिए अपनी संस्कृति को जीवंत रखती हैं। इस प्रकार ये पर्व न केवल आस्था का उत्सव हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की भी झलक देते हैं।

