साहित्यिक चेतना और संगठनात्मक मजबूती का संकल्प: जयपुर में ‘अखिल भारतीय साहित्य परिषद’ का अभ्यास वर्ग संपन्न
| योगेश शर्मा
जयपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर ग्रामीण के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय ‘अभ्यास वर्ग’ वैचारिक मंथन और संगठनात्मक संकल्पों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय साहित्यिक चेतना का संवर्धन, संगठन का सुदृढ़ीकरण और हाल ही में नवंबर माह में संपन्न हुए राष्ट्रीय अधिवेशन के प्रस्तावों को जिला एवं जमीनी स्तर तक पहुँचाना रहा।
प्रथम सत्र: राष्ट्रीय अधिवेशन के लक्ष्यों का विस्तार
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रथम सत्र पूरी तरह से परिषद के परिचय और राष्ट्रीय विजन पर केंद्रित रहा।
- मुख्य वक्ता: अखिल भारतीय संगठन मंत्री मनोज कुमार एवं प्रदेश महामंत्री केशव शर्मा ने सत्र को संबोधित किया।
- प्रमुख बिंदु: वक्ताओं ने नवंबर में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि परिषद का उद्देश्य केवल साहित्य सृजन नहीं, बल्कि भारतीय मूल्यों और राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत साहित्य को जन-जन तक पहुँचाना है। अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को जिला इकाई की कार्ययोजना में शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया।
द्वितीय सत्र: कार्यप्रणाली और ग्रामीण विस्तार पर मंथन
द्वितीय सत्र का विषय ‘संगठन परिचय एवं साहित्य परिषद में कार्य कैसे करें?’ रहा। इस तकनीकी सत्र में संगठनात्मक कौशल पर चर्चा की गई।
- मार्गदर्शन: डॉ. ममता शर्मा एवं डॉ. विपिन चंद्र ने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया।
- रणनीति: इस सत्र में सदस्य विस्तार, साहित्यिक कार्यक्रमों के बेहतर प्रबंधन और विशेष रूप से ग्रामीण अंचल में छिपी हुई साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। वक्ताओं ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होता है, अतः हमारी कार्यप्रणाली पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए।
प्रभावी संचालन और आभार
कार्यक्रम का कुशल संचालन विकास तिवारी द्वारा किया गया, जबकि विकास बागड़ा ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए अभ्यास वर्ग के उद्देश्यों को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में पुरुषोत्तम गुप्ता ने पधारे हुए सभी विद्वानों, साहित्यकारों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
साहित्यकारों का सामूहिक संकल्प
अभ्यास वर्ग के समापन पर उपस्थित साहित्यकारों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे परिषद के ध्येय वाक्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएंगे। प्रतिभागी कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया कि इस अभ्यास वर्ग से प्राप्त मार्गदर्शन आगामी समय में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को एक नई और व्यापक दिशा प्रदान करेगा।

