सावन के पहले सोमवार को अर्धचन्द्रेश्वर महादेव मंदिर में सहस्त्रधारा का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

सावन के पहले सोमवार को अर्धचन्द्रेश्वर महादेव मंदिर में सहस्त्रधारा का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
— प्राचीन कुएं के जल से हुआ जलाभिषेक, जनैऊधारी पंडितों ने की विशेष पूजा

Edited By : सुनील शर्मा 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 14,2025

(हरिप्रसाद शर्मा)
अजमेर। सावन मास के पहले सोमवार को शहर के ऐतिहासिक अर्धचन्द्रेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला। मराठा कालीन इस प्राचीन मंदिर में सहस्त्रधारा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन पंडित संतोष शर्मा के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। सहस्त्रधारा की विशेषता यह रही कि जलाभिषेक केवल जनैऊधारी ब्राह्मण पंडितों द्वारा किया गया और जल के लिए मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुएं के पवित्र जल का ही उपयोग हुआ।

सुबह की पूजा से शुरू हुआ आयोजन
कार्यक्रम के संयोजक महेंद्र सिंह रलावता ने बताया कि आयोजन की शुरुआत प्रातःकालीन पूजा-अर्चना से हुई। इसके पश्चात सहस्त्रधारा, भगवान महादेव का विशेष श्रृंगार एवं भव्य महाआरती की गई। पूरे मंदिर परिसर में शिव भक्ति की धुनों और वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं को अंत में महादेव का प्रसाद वितरित किया गया।

गणमान्यजन भी रहे मौजूद
इस पावन आयोजन में शहर के कई गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं अजमेर उत्तर से कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता, नगर निगम अजमेर के पूर्व उपायुक्त पार्षद गजेंद्र सिंह रलावता, अजमेर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन, महासचिव शिव कुमार बंसल, डॉ. कुलदीप शर्मा, अशोक मल्लिक, अजय टेंगौर, करण सिंह राठौड़, मुकेश सिंह राठौड़, भरत सिंह राणा, राजेंद्र वर्मा, शक्ति सिंह रलावता, मनीष अग्रवाल, धर्मवीर सिंह राठौड़, गिन्नी रलावता, हेमेंद्र सिंह, कर्ण सिंह राठौड़, अहमद हुसैन, दिलीप सामतानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम
सावन के पहले सोमवार को आयोजित यह सहस्त्रधारा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि स्थानीय परंपराओं और जन-भागीदारी का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की सफलता ने यह स्पष्ट किया कि आज भी शिवभक्ति की भावना अजमेरवासियों के दिलों में उतनी ही गहरी और जीवंत है।

यह आयोजन न केवल शिवभक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बना, बल्कि शहर में सावन माह की शुरुआत को भक्ति और भव्यता से सराबोर कर गया।

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