साधुओं के संयम, त्याग और आशीष से ही समाज में शांति का वातावरण; रीवा दुर्घटना के दोषियों को मिले सख्त सजा: आचार्य विशद सागर महाराज

जयपुर/पदमपुरा। योगेश शर्मा 

“जैन दर्शन विश्व का सबसे प्राचीन और शांतिप्रिय धर्म है। आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों ने निर्ग्रंथ मार्ग अपनाकर, श्रमण संस्कृति को आत्मसात कर मोक्ष प्राप्त किया है। वर्तमान में भी हमारे साधु, आचार्य और आर्यिकाएं इसी परम पवित्र मार्ग पर चलते हुए आत्म-साधना कर रहे हैं। संतों की सुरक्षा और उनके जीवन की रक्षा का दायित्व जैन श्रावकों के साथ-साथ सरकारों और प्रशासन का भी है। प्रशासन को अल्पसंख्यक जैन समाज और उनके संतों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करना चाहिए।”

​यह मंगल उद्बोधन राष्ट्र संत, दिगंबर जैन आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ने जयपुर के प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा में संघ सानिध्य में आयोजित धर्मसभा के दौरान व्यक्त किए।

​रीवा (मध्य प्रदेश) की घटना पर गहरी चिंता, असामाजिक तत्वों को दंडित करने की मांग

​धर्मसभा के दौरान अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने मध्य प्रदेश के रीवा में जैन संतों के साथ हुई हालिया दुखद दुर्घटना और अप्रिय घटनाक्रम की ओर आचार्य श्री का ध्यान आकर्षित करते हुए गहरी चिंता प्रकट की।

​इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता व्यक्त करते हुए आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ने दोटूक शब्दों में कहा कि समाज में शांति भंग करने वाले और संतों को आहत करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सरकार को कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में रीवा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

​श्रावकों और प्रशासन के समन्वय से सुनिश्चित हो संतों की सुरक्षा

​आचार्य श्री ने श्रावक धर्म और प्रशासनिक उत्तरदायित्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि साधु अपनी साधना में लीन रहते हैं, इसलिए श्रावकों का यह परम कर्तव्य है कि जब भी संतों का विहार या पदयात्रा हो, वे स्थानीय प्रशासन को अनिवार्य रूप से सूचित करें। प्रशासन का भी यह दायित्व है कि वह साधुओं को उचित सुरक्षा घेरा और संरक्षण प्रदान करे। श्रावक समाज संतों के आहार, विहार और चर्या का पूरा ध्यान रखे, क्योंकि इन त्याग-मूर्तियों के तप और आशीष से ही आज लोक में शांति का वातावरण बना हुआ है।

​पदमपुरा में हुई भक्तिमय चर्या, प्रतिनिधिमंडल ने किया पाद प्रक्षालन

​इससे पूर्व, अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में आचार्य श्री के सानिध्य में प्रातः कालीन दिनचर्या के अंतर्गत विशेष जाप, सामूहिक देव पूजा, जिनेंद्र अभिषेक और विश्व शांति की कामना के साथ ‘शांतिधारा’ संपन्न की गई।

​इस अवसर पर गायत्री नगर (जयपुर) से आए मुनि व्यवस्था समिति के संयोजक तथा मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त मंत्री संजय ठोलिया के नेतृत्व में एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य संघ के दर्शन किए और विधिवत पाद-प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए।

​श्रेष्ठियों को मिला आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद

​कार्यक्रम के समापन पर पदमपुरा मंदिर जी में उपस्थित देश-भर के श्रावक-श्राविकाओं, प्रथम अभिषेक व शांतिधारा का पुण्य अर्जित करने वाले श्रेष्ठि परिवारों सहित संजय ठोलिया, राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, अनिल पोलक्या आदि प्रमुख समाजसेवियों को आचार्य श्री ने मंत्रोच्चार के साथ अपना पावन मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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