सांस्कृतिक मेलजोल: ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत गुजरात के 11 स्कूलों और रायगढ़ के लामीखार स्कूल के बीच हुआ ऑनलाइन ट्विनिंग कार्यक्रम
| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
छाल/धरमजयगढ़: भारत की विविधता में एकता को बढ़ावा देने के लिए संचालित ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के अंतर्गत शनिवार, 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच एक अनूठा सांस्कृतिक संगम देखने को मिला। गुजरात के खेड़ा जिले की 11 प्राथमिक शालाओं ने रायगढ़ जिले के प्राथमिक शाला लामीखार के साथ वर्चुअल माध्यम से ‘ट्विनिंग कार्यक्रम’ किया। इस कार्यक्रम में दोनों राज्यों के नन्हे विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अपनी-अपनी माटी की महक साझा की।
छत्तीसगढ़ी लोक कला और खान-पान से रूबरू हुआ गुजरात
लामीखार स्कूल के छात्र-छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ गुजरात के बच्चों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति की जानकारी दी।
- त्यौहार और गीत: बच्चों ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व ‘छेरछेरा’ के बारे में बताया और छत्तीसगढ़ी भाषा में मधुर गीत व लोक कथाएं सुनाईं।
- पर्यटन और भूगोल: बच्चों ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे ‘राम झरना’ और छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले ‘मेनपाट’ के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।
- प्रकृति: चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ के वनों में पाए जाने वाले विशिष्ट फल, फूल और वन्य जीवों के बारे में भी बताया गया। इसके साथ ही दोनों राज्यों के बच्चों ने एक-दूसरे के स्कूल के समय और वहां पढ़ाए जाने वाले विषयों पर भी चर्चा की।
गुजरात की संस्कृति और प्रवृत्तियों का आदान-प्रदान
जवाब में गुजरात के खेड़ा जिले के छात्रों ने भी अपनी शालाओं में होने वाली विभिन्न गतिविधियों (Activities) और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने:
- गुजरात की पारंपरिक भेष-भूषा, खान-पान और वहां की अनूठी संस्कृति के बारे में बताया।
- गुजराती भाषा में सुंदर कविताएं और लोक गीत सुनाकर छत्तीसगढ़ के बच्चों का मन मोह लिया।
- शाला स्तर पर होने वाली प्रयोगात्मक प्रवृत्तियों पर भी अपने विचार साझा किए।
अधिकारियों और शिक्षकों का सराहनीय प्रयास
लामीखार के शिक्षक निरंजन पटेल ने अपनी पाठशाला की गतिविधियों और क्षेत्रीय विशेषताओं को गुजरात के स्कूलों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस पहल की सराहना करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रायगढ़, डॉ. के.व्ही. राव ने कहा:
”यह कार्यक्रम अत्यंत अद्भुत और ज्ञानवर्धक रहा। ऐसे आयोजनों से बच्चों और शिक्षकों को एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति, खान-पान और रहन-सहन को समझने का मौका मिलता है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।”
यह कार्यक्रम आलोक स्वर्णकार (DMC रायगढ़) और एस.के. सिदार (बीईओ धरमजयगढ़) के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस नवाचार से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें देश की विभिन्न संस्कृतियों को करीब से जानने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

