सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज, भीड़ नियंत्रण में फेल रहा प्रशासन

सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज, भीड़ नियंत्रण में फेल रहा प्रशासन
श्रद्धालुओं में आक्रोश, मंदिर मंडल ने शुरू की जांच

Edited By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 27,2025

चित्तौड़गढ़/मंदफिया।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर में अमावस्या के अवसर पर दर्शन को उमड़ी भारी भीड़ के बीच रविवार को हुए लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों और पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं पर लाठियां बरसाने के दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में एक श्रद्धालु को पुलिस की लाठी से मारते हुए देखा जा सकता है, जिससे उसका हाथ टूट गया।

मामला सामने आने के बाद मंदिर मंडल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि मंदिर में व्यवस्था दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है और सुरक्षाकर्मी अक्सर श्रद्धालुओं से अभद्र व्यवहार करते हैं।


कैसे हुआ विवाद?

अमावस्या पर श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। लंबी कतारों और भीड़ के दबाव के बीच हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसी दौरान एक निजी सुरक्षा कंपनी के गार्ड ने आपा खो दिया और श्रद्धालुओं पर लाठियों से हमला कर दिया। इसके बाद भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए।

इसी दौरान एक पुलिस अधिकारी ने भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति को लाठी मारी, जिससे वह ज़मीन पर गिर पड़ा। घायल श्रद्धालु ने बाद में बताया कि उसका हाथ टूट गया है।


श्रद्धालुओं का गुस्सा फूटा

घटना के बाद कई श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ लोगों ने कहा कि,

“यह पहली बार नहीं हुआ। हर त्योहार या भीड़भाड़ के दिन यही हाल होता है। सुरक्षाकर्मी भक्तों से जैसे अपराधी जैसा व्यवहार करते हैं।”

श्रद्धालुओं ने मांग की कि दोषी सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जाए।


मंदिर प्रशासन की सफाई और जांच की घोषणा

मंदिर मंडल के अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि अत्यधिक भीड़ के कारण स्थिति बिगड़ी थी, लेकिन अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

हालांकि सवाल यह उठ रहे हैं कि जब हर अमावस्या और पर्व पर मंदिर में भीड़ होती है, तो उसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं पहले से क्यों नहीं की जातीं?


लचर व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग मंदिर प्रबंधन की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि धार्मिक आस्था का केंद्र बन चुके सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय प्रतिनिधि कह रहे हैं कि जब किसी धार्मिक स्थल पर लगातार लाखों की भीड़ उमड़ रही है, तो वहां स्थायी और प्रशिक्षित सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। निजी सुरक्षाकर्मी, जो भीड़ प्रबंधन में प्रशिक्षित नहीं होते, उन्हें तैनात करना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।


आगे की कार्रवाई पर निगाहें

अब सबकी नजर मंदिर प्रशासन द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर है। श्रद्धालुओं और आमजन की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो, दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।   यह घटना केवल एक लाठीचार्ज नहीं है, बल्कि आस्था पर चोट है। श्रद्धालुओं के सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है, जिसे निभाना अनिवार्य है।


 

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