सांगानेर में ‘मुर्रा’ का शाही स्वागत: 3.51 लाख में खरीदी भैंस, डीजे की धुन और जुलूस के साथ हुई फार्म पर ‘VIP एंट्री’

सांगानेर में ‘मुर्रा’ का शाही स्वागत: 3.51 लाख में खरीदी भैंस, डीजे की धुन और जुलूस के साथ हुई फार्म पर ‘VIP एंट्री’

जयपुर/मुहाना

| योगेश शर्मा

​राजधानी के सांगानेर स्थित मुहाना क्षेत्र में इन दिनों एक ‘खास मेहमान’ की चर्चा हर जुबान पर है। यह मेहमान कोई विदेशी हस्ती नहीं, बल्कि 3 लाख 51 हजार रुपए में खरीदी गई मुर्रा नस्ल की एक भैंस है। पशुपालक गणेश यादव ने अपनी इस नई भैंस का स्वागत किसी उत्सव की तरह किया, जिसे देखकर पूरा कस्बा हैरान रह गया।

​डीजे की धुन पर थिरके लोग, निकाला गया जुलूस

​गणेश यादव इस बेशकीमती भैंस को झुंझुनूं जिले के सिंघाना से खरीदकर लाए हैं। जैसे ही भैंस मुहाना पहुँची, उसे सीधे फार्म पर ले जाने के बजाय एक भव्य जुलूस निकाला गया।

  • शाही अंदाज: डीजे की धुन पर थिरकते लोग, आतिशबाजी और उत्साह के बीच भैंस को पूरे कस्बे में घुमाया गया।
  • आकर्षण का केंद्र: सड़क के दोनों ओर खड़े बच्चों और ग्रामीणों ने तालियां बजाकर इस अनोखी ‘एंट्री’ का स्वागत किया। कस्बे के लोगों के लिए यह अपनी तरह का पहला वाकया था जब किसी पशु का स्वागत इस राजसी अंदाज में हुआ।

​क्यों खास है यह मुर्रा भैंस?

​यह भैंस केवल अपनी कीमत की वजह से ही चर्चा में नहीं है, बल्कि इसकी शारीरिक बनावट और दूध देने की क्षमता भी बेमिसाल है।

  1. दूध की क्षमता: यह भैंस प्रतिदिन 24 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है।
  2. नस्ल की विशेषता: मुर्रा नस्ल को विश्वभर में ‘ब्लैक गोल्ड’ (काला सोना) कहा जाता है, जो अपने उच्च वसायुक्त दूध और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है।

​”पशु नहीं, परिवार का सदस्य है”

​पशुपालक गणेश यादव ने अपनी इस अनूठी पहल पर कहा, “मुझे पशुओं से गहरा लगाव है। मेरे लिए मेरा पशु केवल आय का साधन नहीं, बल्कि परिवार का एक अभिन्न हिस्सा है। जैसे हम घर में किसी खास मेहमान के आने पर खुशी मनाते हैं और उसका स्वागत करते हैं, वैसे ही मैंने अपनी इस भैंस का स्वागत किया है। इससे मुझे आत्मिक शांति मिलती है।”

​कस्बे में बनी चर्चा का विषय

​मुहाना कस्बे के लोगों का कहना है कि गणेश यादव की इस पशु-प्रेम की मिसाल ने सबको प्रभावित किया है। अब लोगों के बीच यह चर्चा है कि जिस भैंस की ‘एंट्री’ इतनी शाही रही है, निश्चित तौर पर फार्म पर भी उसका ख्याल ‘वीआईपी’ अंदाज में ही रखा जाएगा। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुओं के प्रति आज भी राजस्थान के किसानों में कितना मान-सम्मान और स्नेह है।

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