सांगानेर पंचायत समिति का नाम और मुख्यालय बदलने की तैयारी: अब ‘बगरू’ के नाम से जानी जाएगी समिति
जयपुर, 5 मार्च 2026
| सुनील शर्मा
राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि सांगानेर पंचायत समिति का नाम और मुख्यालय बदलने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब इस पंचायत समिति को बगरू पंचायत समिति के नाम से जाना जाएगा और इसका प्रशासनिक केंद्र (मुख्यालय) भी बगरू विधानसभा क्षेत्र में ही स्थानांतरित किया जाएगा।
विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब
यह जानकारी मदन दिलावर ने विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम-131 के तहत विधायक कैलाश चंद वर्मा द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए दी। सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान व्यवस्था में भौगोलिक और प्रशासनिक विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है।
नाम और मुख्यालय बदलने के प्रमुख कारण
मंत्री ने इस परिवर्तन के पीछे मुख्य तर्कों को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:
- क्षेत्रीय विसंगति: वर्तमान में बगरू विधानसभा क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतें सांगानेर पंचायत समिति के अंतर्गत आती हैं, जो तकनीकी और प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत नहीं है।
- जनहित को प्राथमिकता: स्थानीय निवासियों को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, इसके लिए मुख्यालय को बगरू विधानसभा क्षेत्र में ही स्थापित करना आवश्यक है।
- पहचान का मिलान: क्षेत्र की पंचायतों की पहचान बगरू से जुड़ी होने के कारण पंचायत समिति का नाम भी बगरू के नाम पर ही होना चाहिए।
आगे की विधिक प्रक्रिया
मदन दिलावर ने सदन को आश्वस्त किया कि यह परिवर्तन आनन-फानन में नहीं, बल्कि पूरी विधिक प्रक्रिया (Legal Process) के तहत किया जाएगा। सरकार पहले नियमों के अनुसार परीक्षण करवाएगी और विधिक पहलुओं की जांच के बाद ही मुख्यालय के स्थानांतरण और नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी की जाएगी।
”जनहित को ध्यान में रखते हुए हम विधिक प्रक्रिया अपनाकर पंचायत समिति का नाम बगरू करेंगे। नियमानुसार परीक्षण के बाद मुख्यालय भी बगरू में ही स्थापित होगा।”
— मदन दिलावर, पंचायती राज मंत्री
इस निर्णय से बगरू क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता में खुशी की लहर है, क्योंकि वे लंबे समय से पंचायत समिति के विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर मुख्यालय की मांग कर रहे थे।
