सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025: रैम्प पर उतरी ग्रामीण प्रतिभा, अभिनेत्री डेज़ी शाह और SHG महिलाओं ने बिखेरा जलवा
जयपुर | 26 दिसंबर, 2025
| गौरव कोचर
जयपुर: पिंक सिटी के शिल्प और संस्कृति के संगम ‘सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025’ में गुरुवार का दिन बेहद खास रहा। क्रिसमस के अवकाश के चलते मेले में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जहाँ एक ओर ग्रामीण हस्तशिल्प ने लोगों का मन मोहा, वहीं दूसरी ओर फैशन शो में ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास ने सबका दिल जीत लिया।

रैम्प पर ग्रामीण सशक्तिकरण की झलक
मेले की सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण एक भव्य फैशन शो रहा। इस शो की ‘शो स्टॉपर’ बॉलीवुड अभिनेत्री डेज़ी शाह रहीं, जिन्होंने हेरिटेज दरबार कश्मीरी सिल्क साड़ी पहनकर रैम्प वॉक किया।
इस शो की सबसे बड़ी विशेषता स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी रही। पारंपरिक परिधानों में सजी इन महिलाओं ने जब रैम्प पर कदम रखे, तो पूरा परिसर तालियों से गूँज उठा। इनमें मुख्य रूप से शामिल थीं:
- जयश्री वर्मा (उत्तराखंड)
- सुमित्रा (चूरू, राजस्थान)
- रुचिका (हिमाचल प्रदेश)
- माधोबी (पश्चिम बंगाल)
- रहीमुनीसा (आंध्र प्रदेश)
हस्तशिल्प और कला का प्रदर्शन
फैशन शो के दौरान देश के विभिन्न कोनों की कला का प्रदर्शन किया गया। मॉडलों ने गुजराती लहंगा, आंध्र प्रदेश की साड़ियाँ, बाड़मेर की शॉल व जैकेट और कश्मीरी सूट जैसे पारंपरिक परिधान प्रदर्शित किए। साथ ही बाड़मेर कढ़ाई वाले स्लिंग बैग और पश्चिम बंगाल के हाथ से पेंट किए गए बांस के पंखों जैसी एक्सेसरीज ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
डॉ. रूमा देवी का प्रेरणादायक टॉक शो
मेले के दौरान राजीविका की ब्रांड एम्बेसडर डॉ. रूमा देवी ने “एम्पॉवरिंग वीमेन, ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स – फ्रॉम स्किल टू सेल्फ रिलायंस” विषय पर विशेष टॉक शो को संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया और राजीविका के माध्यम से हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला।
बच्चों के लिए लाइव कक्षाएं और सांस्कृतिक रंग
क्रिसमस की छुट्टी के कारण मेले में बच्चों की भारी भीड़ रही। बच्चों ने लाइव कक्षाओं में मिट्टी के बर्तन बनाने, क्रोशिया, मंडला आर्ट और पेंटिंग जैसी कलाएँ सीखीं। शाम को महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कलाकार शिखा जोशी द्वारा प्रस्तुत लावणी और गोंडल नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फूड कोर्ट और खरीदारी का आनंद
मेले में आए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों ने देश के विभिन्न राज्यों के लजीज व्यंजनों का स्वाद चखा। हस्तकला उत्पादों की जमकर खरीदारी हुई, जिससे ग्रामीण शिल्पकारों के चेहरे खिल उठे। यह मेला न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में महिला शक्ति का एक बड़ा मंच बनकर उभरा है।

