“सरकार कर रही मनमानी, बेटी पढ़ाओ की बात बेमानी” – प्रिंसिपल का तबादला रद्द करने की मांग पर ग्रामीणों का धरना
जयपुर। लोकेंद्र सिंह शेखावत
बगरू विधानसभा क्षेत्र के मंदाऊ गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रिंसिपल अशोक कुमार मीणा का तबादला रद्द कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है। ग्रामीणों ने विद्यालय के मुख्यद्वार पर ताला जड़ दिया है और बाहर टैंट लगाकर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
“बेटी पढ़ाओ” पर सवाल
पूर्व सरपंच कैलाश शर्मा ने कहा कि एक ओर सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने गांव की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए स्कूल का निर्माण करवाया, मगर सरकार ने यहां से प्रिंसिपल का तबादला कर दिया। शर्मा ने मांग की कि शिक्षा को राजनीति से दूर रखा जाए और अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन मिले, सजा नहीं।

शिक्षा सुधार में अहम भूमिका
ग्रामीणों का कहना है कि प्रिंसिपल अशोक कुमार मीणा के नेतृत्व में गांव के स्कूल का शिक्षा स्तर उल्लेखनीय रूप से सुधरा है। उनके प्रयासों से बोर्ड परीक्षा का परिणाम 100 प्रतिशत रहा और कई छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। इससे पहले ज्यादातर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते थे, लेकिन अब सरकारी स्कूल पर भरोसा बढ़ा है।
समर्पण की मिसाल
पूर्व सरपंच ने बताया कि प्रिंसिपल मीणा के जज्बे से प्रभावित होकर ग्रामीणों ने 4,500 वर्गमीटर जमीन स्कूल के लिए दी और लगभग 3.25 करोड़ रुपये की लागत से नया भवन बनवाया। निर्माण कार्य के दौरान प्रिंसिपल मीणा अक्सर रात 12 बजे तक साइट पर मौजूद रहते थे और हर पहलू पर खुद नजर रखते थे। ग्रामीणों का कहना है कि नए प्रिंसिपल शायद इतनी मेहनत और समर्पण नहीं दिखा पाएंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
पुरस्कारों के बावजूद तबादला
अशोक कुमार मीणा को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जयपुर कलेक्टर द्वारा प्रशंसा-पत्र, राज्य स्तरीय भामाशाह पुरस्कार, जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान, और नीपा दिल्ली की ओर से बेस्ट टीचर अवॉर्ड जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी उपलब्धियों के बावजूद उनका तबादला करना अच्छे कार्य की सजा जैसा है।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक तबादला आदेश रद्द नहीं किया जाता, वे धरना जारी रखेंगे और स्कूल को नहीं खोलने देंगे। उनका कहना है कि प्रिंसिपल मीणा का गांव और विद्यार्थियों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, इसलिए उनकी मौजूदगी शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
यह आंदोलन न केवल शिक्षा के प्रति ग्रामीणों की जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि सरकारी तबादला नीतियों पर भी सवाल खड़े करता है कि क्या उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन के बजाय स्थानांतरण जैसी सजा मिलनी चाहिए।

