समुद्र के समान कोई जलाशय नहीं, वैसे ही तीर्थराज पुष्कर के समान कोई तीर्थ नहीं – मुख्यमंत्री धामी
रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
पुष्कर/अजमेर।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को तीर्थराज पुष्कर पहुंचे, जहाँ उन्होंने ब्रह्मा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि “जैसे समुद्र के समान कोई जलाशय नहीं, वैसे ही तीर्थराज पुष्कर के समान कोई तीर्थ नहीं है।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके माता-पिता ने पुष्कर तीर्थ की महिमा से प्रभावित होकर ही उनका नाम पुष्कर रखा था।
ब्रह्मा मंदिर दर्शन, पारंपरिक स्वागत और लोकार्पण समारोह
| फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स
मुख्यमंत्री धामी ने विश्वप्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर में दर्शन किए। मंदिर के पश्चात उनका रावत धर्मशाला, मत्स्य मंदिर में समाजजनों द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया।
इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला (उत्तराखंड आश्रम) में राज्य सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये की सहायता राशि से निर्मित नवनिर्मित द्वितीय तल का लोकार्पण किया। साथ ही भामाशाहों के सहयोग से 10 लाख रुपये की लागत से स्थापित लिफ्ट का शुभारम्भ भी किया गया। पर्वतीय समाज ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
धामियों को सुविधाएँ—धामी का फोकस
फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मशाला का द्वितीय तल बनने से पुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित प्रवासी सम्मेलन में देशभर के प्रवासीजन बड़ी संख्या में भाग लेते हैं, जो समाजिक संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
“चारधाम यात्रा का पुण्य पुष्कर सरोवर में स्नान से प्राप्त होता है” – धामी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने पुष्कर तीर्थ की दिव्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा—
- “जैसे समुद्र अद्वितीय जलाशय है, वैसे ही दुनिया में कोई तीर्थ पुष्कर जैसा नहीं है।”
- “यह स्थान ब्रह्मा जी की स्थली है, अनेक ऋषियों की तपोभूमि है और भारतीय संस्कृति, तप व त्याग का जीवंत केंद्र है।”
- “चारधाम यात्रा का पुण्य भी पुष्कर सरोवर में स्नान करने से प्राप्त होता है।”
सांस्कृतिक संबंधों और विरासत संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राजस्थान और उत्तराखंड के बीच सामाजिक व सांस्कृतिक रिश्ते बेहद प्रगाढ़ हैं। उन्होंने पर्वतीय समाज द्वारा विरासत संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।
देशभर में धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए धामी ने बताया—
- महाकाल लोक,
- केदारनाथ में रोपवे निर्माण,
- हेमकुंड साहिब की सुगम यात्रा,
- यमुना तीर्थ सर्किट,
- हरिद्वार का गंगा कॉरिडोर,
- शारदा कॉरिडोर परियोजना
जैसे बड़े कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर उत्तराखंड सरकार के कदम
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि—
- कन्वर्जन विरोधी कानून,
- लव जिहाद विरोधी कानून,
- दंगा विरोधी कानून,
- समान नागरिक संहिता (UCC)
राज्य में लागू किए गए हैं, जिनसे सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों से वसूली की जाएगी।
साथ ही मदरसा बोर्ड को भंग कर सभी स्कूलों में सरकारी बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
‘ऑपरेशन कालनेमी’ के माध्यम से धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
पर्वतीय समाज को संदेश—राष्ट्रप्रेम और संस्कारों को मजबूत करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक मूल्य और अपनी विरासत को मजबूत बनाए रखें।
उन्होंने धर्मशाला में शेष कार्य—लाइटिंग, गर्म पानी आदि के लिए 50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि देने की घोषणा की।
अतिथियों के संबोधन
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा पुष्कर में धर्मशाला निर्माण को सहयोग देना अत्यंत सराहनीय है।
गंगा में अस्थि विसर्जन के बाद श्रद्धालु पुष्कर अवश्य आते हैं, इसलिए दोनों क्षेत्रों का आत्मीय संबंध बहुत गहरा है।
ओंकार सिंह लाखावत, अध्यक्ष—धरोहर संरक्षण प्राधिकरण
लाखावत ने कहा कि पुष्कर के समग्र विकास के लिए विशिष्ट परियोजना पर कार्य प्रारंभ हो चुका है।
उन्होंने बताया कि पुष्कर तीर्थों का ‘गुरु’ है और यहाँ भारत के सभी समाजों के गुरु स्थान और बही उपलब्ध हैं।
विधायक कुलदीप धनकड़
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में विकास को नई गति मिली है और धर्मशाला को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया गया है।
स्मारिका विमोचन और सम्मान समारोह
कार्यक्रम में उत्तराखंड आश्रम पर आधारित स्मारिका पुस्तिका का विमोचन किया गया।
साथ ही भामाशाहों एवं गणमान्य व्यक्तियों—
संदीप पांडे, बुद्धिप्रकाश, डॉ. भारत, प्रताप सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, हरीश चंद्र पांडे, आनंद सिंह, श्रीमती मंजू मासीवाल सहित अनेक को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में जिला कलक्टर लोक बंधु, अतिरिक्त जिला कलक्टर ज्योति ककवानी, नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे।
धर्मशाला का इतिहास और वर्तमान स्थिति
अध्यक्ष एवं संरक्षक डॉ. एस.एस. तड़ागी ने बताया—
- पर्वतीय समाज की यह संस्था 1936 से सक्रिय है।
- सदस्यों, भामाशाहों व जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विशाल धर्मशाला निर्माण संभव हो पाया है।
- नव-निर्मित द्वितीय तल में 15 वातानुकूलित कक्ष बनाए गए हैं।
- इसके निर्माण में उत्तराखंड सरकार का एक करोड़ रुपये का योगदान रहा है।
कार्यक्रम में पर्वतीय समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।