समान मंडी सेस, ई-कॉमर्स रेगुलेटर और जीएसटी सरलीकरण की मांग — बीयूवीएम
By : लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 01,2025
एफएसएसएआई सैंपल टेस्टिंग अवधि एक वर्ष करने का प्रस्ताव
जयपुर, 1 अगस्त।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) ने अपने 44वें स्थापना दिवस (3 अगस्त) से पहले केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष कर प्रणाली, ई-कॉमर्स नियमन और खाद्य सुरक्षा नियमों में महत्वपूर्ण सुधारों की मांग रखी है। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा दे रही है, लेकिन वर्तमान में जीएसटी की अनेक टैक्स दरें एमएसएमई और व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती हैं।
जीएसटी सरलीकरण का प्रस्ताव
गुप्ता ने सुझाव दिया कि जीएसटी दरों को केवल तीन स्लैब — 0%, 5% और 18% — में सीमित किया जाए। उनका मानना है कि इससे कारोबारियों पर कर अनुपालन का बोझ कम होगा और GDP वृद्धि में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी खाद्य उत्पादों पर 0% टैक्स होना चाहिए, जबकि खाद्यान्न, दालें, तिलहन के लिए क्लीनिंग-ग्रेडिंग मशीनें, एलईडी लैंप, सबमर्सिबल पंप, हार्डवेयर, स्टेनलेस स्टील, ₹1000 तक के खिलौने, खाद्य तेल, बेकरी उत्पाद, सौर वाटर हीटर, घी, अचार, हस्तशिल्प और ₹1000 प्रतिदिन तक के होटल रूम को 5% स्लैब में रखा जाए। बाकी सभी उत्पाद 18% स्लैब में आने चाहिए।
मंडी सेस में समानता की मांग
बीयूवीएम के राष्ट्रीय वरिष्ठ महासचिव मुकुंद मिश्र ने कहा कि वर्तमान में राज्यों में कृषि मंडी सेस 0% से 4% के बीच है, जिससे असमानता पैदा होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी राज्यों में मंडी सेस को 100 रुपए पर 50 पैसे तय किया जाए। इससे ‘वन नेशन, वन मार्केट’ की दिशा में बड़ा कदम होगा और किसानों व व्यापारियों को बराबरी का अवसर मिलेगा।
एफएसएसएआई नियमों में संशोधन
बीयूवीएम अध्यक्ष प्रेम अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान में एफएसएसएआई नियमों के तहत हर छह महीने में खाद्य सैंपल टेस्टिंग अनिवार्य है, जो छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक बोझ बन गया है। उन्होंने मांग की कि यह अवधि साल में एक बार कर दी जाए।
ई-कॉमर्स पर रेगुलेटर की जरूरत
वरिष्ठ महासचिव हेमंत गुप्ता ने कहा कि ई-कॉमर्स का अनियंत्रित विस्तार पारंपरिक व्यापारियों के लिए चुनौती है। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को मजबूत करने के लिए ई-कॉमर्स के लिए एक स्वतंत्र रेगुलेटर नियुक्त किया जाना चाहिए, जैसे बैंक और बीमा क्षेत्र में होता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि एमआरपी से कम कीमत पर कोई भी उत्पाद नहीं बेचा जाना चाहिए, ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
एमएसएमई और कर प्रावधानों पर सुझाव
महासचिव राकेश यादव ने एमएसएमई के वर्गीकरण में व्यापार की प्रकृति के आधार पर संशोधन और टर्नओवर आधारित सब्सिडी को व्यावहारिक बनाने की मांग की।
संगठन ने टीडीएस और टीसीएस जैसे प्रावधानों को भी तत्काल हटाने का आग्रह किया, ताकि व्यापारियों पर अनुपालन का अनावश्यक बोझ कम हो सके।
स्थापना दिवस कार्यक्रम
बीयूवीएम अपना 44वां स्थापना दिवस 3 अगस्त, 2025 को नई दिल्ली में मनाएगा। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कानून एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल और सड़क परिवहन व कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले व्यापारियों को भामाशाह सम्मान प्रदान किया जाएगा। लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मरणोपरांत उन व्यापारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने संगठन के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
1981 में स्थापित बीयूवीएम, देशभर के व्यापारियों की आवाज़ को नीतिगत स्तर तक पहुंचाने वाला एक प्रमुख संगठन है, जो लगातार व्यापार-अनुकूल सुधारों के लिए प्रयासरत है।