सफलता की कहानी: मिट्टी जांच ने बदली नारायण लाल की तकदीर, खेती की लागत 40% घटी

सफलता की कहानी: मिट्टी जांच ने बदली नारायण लाल की तकदीर, खेती की लागत 40% घटी

| नरेश गुनानी

जयपुर, 6 फरवरी 2026। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन ‘ग्राम उत्थान’ को धरातल पर उतारते हुए जयपुर जिले में आयोजित हो रहे शिविर किसानों के लिए खुशहाली का द्वार खोल रहे हैं। झोटवाड़ा पंचायत समिति के किशोरपुरा काकरोदा गाँव के प्रगतिशील किसान नारायण लाल शर्मा इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरे हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर खेती को घाटे से उबारकर मुनाफे का सौदा बना दिया है।

परंपरागत खेती से वैज्ञानिक खेती का सफर

​नारायण लाल शर्मा साल 2023 तक अपनी जमीन की सेहत जाने बिना, परंपरागत तरीके से खेती कर रहे थे। मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, इसकी जानकारी न होने के कारण वे उर्वरकों (खाद) का अंधाधुंध उपयोग करते थे। परिणाम स्वरूप:

  • ​खेती की लागत बढ़ती जा रही थी।
  • ​फसल का उत्पादन और गुणवत्ता स्थिर या कम हो रही थी।
  • ​जमीन की उपजाऊ शक्ति क्षीण हो रही थी।

सॉइल हेल्थ कार्ड (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) से मिला समाधान

​कृषि पर्यवेक्षक सावित्री कुमावत की सलाह पर नारायण लाल ने अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाई। जांच के बाद उन्हें सॉइल हेल्थ कार्ड प्रदान किया गया, जिसने उनकी खेती का नजरिया ही बदल दिया। कार्ड से उन्हें पता चला कि उनकी मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और किनकी अधिकता।

जैविक खाद और संतुलित उर्वरक का कमाल

​कार्ड में दिए गए सुझावों के अनुसार, नारायण लाल ने संतुलित उर्वरकों के साथ-साथ जैविक पद्धतियों को अपनाया:

  1. जैविक आदान: सड़ी हुई गोबर खाद, जीवामृत और धनजीवामृत का प्रयोग शुरू किया।
  2. उन्नत फसलें: गेहूं, बाजरा और सब्जियों की खेती वैज्ञानिक पद्धति से की।
  3. बगीचे में सुधार: यही जैविक तरीका उन्होंने अपने फलदार बगीचे में भी लागू किया।

परिणाम: लागत में 40% की कमी और बढ़ा मुनाफा

​वैज्ञानिक खेती अपनाने के सुखद परिणाम जल्द ही सामने आए:

    • लागत में भारी गिरावट: अंधाधुंध रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम होने से खेती की लागत 40 प्रतिशत तक घट गई।
    • आय में वृद्धि: फसल की गुणवत्ता सुधरने से बाजार में बेहतर दाम मिले और उत्पादन भी बढ़ा।
    • भूमि संरक्षण: जैविक खादों के उपयोग से भूमि की उर्वरता सुरक्षित हुई और मिट्टी पहले से अधिक उपजाऊ बनी।

​”मिट्टी की जांच कराना वैसा ही है जैसे बीमार होने पर डॉक्टर से सलाह लेना। बिना जांच के खाद डालना पैसे की बर्बादी है। मैं सभी किसान भाइयों से अपील करता हूँ कि मिट्टी जांच के आधार पर ही खेती करें।” — नारायण लाल शर्मा, कृषक

 

ग्राम उत्थान शिविर में मिला सम्मान

​शुक्रवार को मुण्डियारामसर में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर के दौरान सहायक कृषि अधिकारी (धानक्या) ने नारायण लाल को पुनः सॉइल हेल्थ कार्ड प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर नारायण लाल ने राज्य सरकार और कृषि विभाग की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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