सफलता की कहानी: बैंक सखी बन संज्योति चौहान ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल

गणपत चौहान/ ब्यूरो चीफ़ छत्तीसगढ़ 

रायपुर, 4 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। जशपुर जिले की संज्योति चौहान आज राज्य की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं, जो घर और दुकान संभालते हुए बैंकिंग सेवाओं के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं।

स्व-सहायता समूह से मिली नई दिशा

​जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम टांगरगाँव की निवासी संज्योति चौहान ‘चांदनी स्व-सहायता समूह’ की सदस्य हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। शासन की योजनाओं और समूह के सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने का नया मार्ग दिखाया।

बैंकिंग और व्यापार का संगम

​वर्ष 2019 से संज्योति चौहान ग्रामीण बैंक से संबद्ध बैंक सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। उनकी कार्यकुशलता की विशेषता यह है कि वे अपनी किराना दुकान का संचालन करने के साथ-साथ ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।

प्रमुख उपलब्धियां:

    • लेन-देन: हर महीने लगभग 8 से 9 लाख रुपये का वित्तीय लेन-देन।
    • मासिक आय: बैंकिंग सेवाओं से औसतन 3 से 4 हजार रुपये की अतिरिक्त आय।
    • डिजिटल साक्षरता: ग्रामीणों को डिजिटल भुगतान, बीमा योजनाओं और अन्य वित्तीय सेवाओं का लाभ पहुंचाना।

​”शुरुआत में पूंजी की कमी थी, लेकिन स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिले 68 हजार रुपये के ऋण ने मेरा रास्ता आसान कर दिया। आज मैं न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रही हूं, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जी रही हूं।”

संज्योति चौहान

 

बिहान योजना: महिला सशक्तिकरण का आधार

​संज्योति की यह सफलता दर्शाती है कि बिहान योजना केवल ऋण देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने का एक सशक्त मंच है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ रही है, जिससे संज्योति जैसी महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

​अपनी इस उपलब्धि और स्वावलंबन के लिए संज्योति चौहान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

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