बुधराम अग्रवाल, कुड़ेकेला
‘सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क’—यह अब महज कोई कहावत या मुहावरा नहीं रह गया है, बल्कि छाल से एडू जाने वाले मुख्य मार्ग पर हर दिन सफर करने वाले हजारों बेबस और असहाय लोगों की खौफनाक हकीकत बन चुकी है। दशकों का समय बीत गया, कई चुनाव आए और गए, जनप्रतिनिधियों के चेहरे और प्रदेश की सरकारें बदल गईं; लेकिन यदि कुछ नहीं बदला, तो वह है इस क्षेत्र के लोगों का दर्द और इस मुख्य मार्ग का जर्जर व दयनीय अस्तित्व। आलम यह है कि अब इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों और राहगीरों का आवागमन पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच चुका है।
घड़ियाली आंसू बहाती राजनीति और सोता प्रशासन
इस बदहाल सड़क को लेकर क्षेत्र में सियासत भी चरम पर है। जब-जब जो भी राजनैतिक दल विपक्ष की भूमिका में होता है, वह सड़कों पर उतरकर जनता के सामने घड़ियाली आंसू बहाता है, प्रदर्शन करता है और झूठी हमदर्दी बटोरने की पुरजोर कोशिश करता है। लेकिन सत्ता की मलाई मिलते ही इन्हीं नेताओं और जनप्रतिनिधियों को जनता का यह भयानक दर्द दिखना पूरी तरह बंद हो जाता है। जनप्रतिनिधियों की इस ‘यूज एंड थ्रो’ वाली अवसरवादी नीति से स्थानीय निवासियों और राहगीरों में भारी आक्रोश पनप रहा है।
ठेकेदार और अफसरों का नापाक गठजोड़
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी ठेकेदारों के सामने पूरी तरह नतमस्तक नजर आते हैं। सड़क मरम्मत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये के टेंडर जारी किए जाते हैं, कागजों पर लीपापोती का खेल खेला जाता है, लेकिन धरातल पर बनती ही सड़क पहली ही बारिश में पूरी तरह बह जाती है। कार्य की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है। PWD अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए अब नित नए-नए बहाने तलाश रहा है।
जिम्मेदारी का ‘बॉलिंग-बैटिंग’ खेल: PWD बनाम SECL
अपनी प्रशासनिक कमजोरी और घटिया निर्माण पर पर्दा डालने के लिए लोक निर्माण विभाग ने अब एक नया पैंतरा अपनाया है। PWD अधिकारियों का कहना है कि इस मुख्य मार्ग पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की भारी-भरकम गाड़ियों और अंधाधुंध कोयला परिवहन की वजह से सड़क की यह दुर्दशा हुई है, इसलिए इसके रखरखाव और निर्माण की पूरी जिम्मेदारी SECL की ही बनती है।
हालांकि, इस दलील के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े होते हैं:
- क्या PWD ने आधिकारिक और लिखित रूप से इस सड़क के स्थायी निर्माण और रखरखाव का जिम्मा SECL को हस्तांतरित (Transfer) किया है?
- यदि ऐसा कोई हस्तांतरण नहीं हुआ है, तो लोक निर्माण विभाग अपनी संवैधानिक जवाबदेही से मुंह कैसे मोड़ सकता है?
- घटिया और गुणवत्ताहीन काम करने वाले ठेकेदारों व जिम्मेदार अफसरों पर अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- दो विभागों की इस आपसी खींचतान में आखिर जनता कब तक हादसों का दंश सहती रहेगी?
जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर क्षेत्रवासी
विभाग और SECL के बीच चल रही इस ब्लेम गेम की ‘बॉलिंग-बैटिंग’ में गेंद की तरह सिर्फ और सिर्फ आम जनता पिस रही है। जहरीली धूल, जानलेवा गड्ढे और आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बीच क्षेत्रवासी अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस छाल-एडू मार्ग का स्थायी व गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का यह शांत गुस्सा एक विकराल जनांदोलन का रूप ले लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।