सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बना मानव जीवन बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा

लोकेंद्र सिंह शेखावत 

जयपुर, 12 जून 2026। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन तथा सड़क सुरक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना, मानव जीवन की सुरक्षा करना और सड़क हादसों में कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा को एक ‘जन आंदोलन’ का रूप देते हुए साझा जिम्मेदारी के साथ काम करें और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए धरातल पर ठोस व प्रभावी कदम उठाएं।

​डॉ. बैरवा ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल एक सरकारी दायित्व नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर और प्रभावी प्रयास कर रही है।

​स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की 22वीं बैठक में समीक्षा

​उपमुख्यमंत्री शुक्रवार को शासन सचिवालय में आयोजित स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की 22वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक के दौरान उन्होंने 21वीं बैठक में लिए गए निर्णयों की क्रियान्विति की प्रगति जांची। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में संचालित सड़क सुरक्षा गतिविधियों, केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना की प्रगति और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 10 वर्षीय सड़क सुरक्षा कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को हर काम समयबद्ध सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

​नियमों में संशोधन और पीड़ितों को तत्काल सहायता

​डॉ. बैरवा ने सड़क सुरक्षा नियमावली में आवश्यक और व्यावहारिक संशोधन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता मिलनी चाहिए और उनके लिए सहायता राशि स्वीकृत करने में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा मित्रों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें उचित प्रोत्साहन राशि के साथ-साथ आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

​चालकों का प्रशिक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य

​भारी वाहनों के संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भारी वाहन चालकों के लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) के समय उन्हें उचित और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाए। इसके साथ ही बस एवं ट्रक चालकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उनके लिए पर्याप्त विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि थकान के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके। मोटर वाहन कर्मकार अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार वाहन चालकों द्वारा निर्धारित समय तक ही वाहन संचालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता और प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।

​युवाओं में जागरूकता और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) ट्रेनिंग

​सड़क सुरक्षा के प्रति भावी पीढ़ी को जागरूक करने के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा शिक्षा को प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, सभी जिलों के शिक्षण संस्थानों में बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे दुर्घटना की स्थिति में आम नागरिक और विद्यार्थी पीड़ितों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध करा सकें।

​हाईवे पर पुख्ता सुरक्षा और ITMS पर जोर

​बैठक में राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) पर स्थित आबादी क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों, जंक्शनों तथा उनसे जुड़ी छोटी सड़कों पर नियमानुसार रोड फर्नीचर, स्पीड ब्रेकर, संकेत बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यात्रियों की सुगम और आरामदायक यात्रा के लिए बसों की फिटनेस, मरम्मत और रखरखाव कार्यों को प्राथमिकता देने तथा यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया। बैठक में राज्य के राजमार्गों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की स्थापना की प्रगति तथा राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा अभियान की भी समीक्षा की गई।

​भले मददगारों (Good Samaritan) को अब 10 हजार रुपये का प्रोत्साहन

​डॉ. बैरवा ने मुख्यमंत्री आयुष्मान जीवन रक्षा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाने वाले “गुड सेमेरिटन” (भले मददगारों) को समाज में प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने गुड सेमेरिटन को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 5 हजार रुपये से बढ़ाकर अब 10 हजार रुपये कर दिया है। राज्य में अब तक ऐसे 340 भले मददगारों को सम्मानित किया जा चुका है।

​बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित

​इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन सचिव डॉ. जोगा राम, परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा, प्रशिक्षण एवं यातायात डीजीपी अनिल पालीवाल, महानिरीक्षक दीपक कुमार, यातायात एडीजीपी डॉ. बी.एल. मीना सहित पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस विभाग के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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