सज्जनगढ़ में दो दिवसीय वन मेले का भव्य आगाज: सरकार की मंशा हम पुनः वेदों और प्राकृतिक जीवन की ओर लौटें — बाबूलाल खराड़ी
उदयपुर/जयपुर, 17 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
वन उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा उदयपुर के ऐतिहासिक सज्जनगढ़ में शनिवार से दो दिवसीय वन मेले का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने फीता काटकर किया। इस मेले में वन आधारित उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें उदयपुर संभाग सहित आसपास के क्षेत्रों के उत्पादक अपने प्राकृतिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
”केमिकल नहीं, वन औषधियों से सुरक्षित होगा स्वास्थ्य”
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने पारंपरिक ज्ञान और वेदों की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
- वेदों की ओर वापसी: सरकार की मंशा है कि समाज पुनः वेदों और प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाए।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: आधुनिक केमिकल युक्त चिकित्सा पद्धतियों पर अत्यधिक निर्भरता ने मानव आयु और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जबकि प्राचीन काल में लोग वन औषधियों के उपयोग से दीर्घायु और निरोगी रहते थे।
- आजीविका और स्वास्थ्य का संगम: वन उपज न केवल स्वास्थ्य के लिए वरदान है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए आय का एक सशक्त जरिया भी है।
मंत्री ने प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन कर वन उत्पादों की गुणवत्ता, उनकी मार्केटिंग और भविष्य की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन के लिए ट्राईफेड (TRIFED) जैसी संस्थाओं के कार्यों की सराहना की।
अरावली का संरक्षण और मूल्य संवर्धन
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने वनवासियों और वनों के अटूट संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:
- वनों के संरक्षक: जहाँ वनवासी हैं, वहाँ वन आज भी सुरक्षित हैं। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण में वन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- वैल्यू एडिशन: महुआ और शहद जैसे वन उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर ग्रामीणों की आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अरावली के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके संरक्षण हेतु गंभीर प्रयासों की आवश्यकता जताई।
बांस बनेगा आजीविका का नया आधार
लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने ग्रामीण समुदायों के ज्ञान की प्रशंसा की। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें दुनिया भर की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेस’ को अपनाना चाहिए। डॉ. रावत ने कहा कि बांस (Bamboo) ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा माध्यम बन सकता है और विभाग को इस दिशा में विशेष कार्य योजना बनाने की जरूरत है।
मेले के मुख्य आकर्षण
- वन उत्पादों की प्रदर्शनी: शुद्ध शहद, महुआ उत्पाद, हर्बल औषधियां और हस्तशिल्प।
- मार्केटिंग प्लेटफॉर्म: ग्रामीण उत्पादकों को सीधे शहर के उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर।
- जागरूकता सत्र: पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के सीमित दोहन पर चर्चा।
इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं।

