सक्षम गौशाला विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में गौशाला संचालकों को योजनाओं की दी जानकारी
12 नवम्बर 2025, 07:52 PM
रिपोर्ट सुनील शर्मा, टेलीग्राफ टाइम्स
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जयपुर, 12 नवम्बर। पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत के निर्देशानुसार गौशालाओं को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “सक्षम गौशाला अभियान” के तहत बुधवार को गौशाला प्रबंधकों के लिए एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेशभर के 738 गौशाला प्रबंधकों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण सत्र में गोपालन निदेशालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, नीतियों और प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि “सिर्फ योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं, उनका वास्तविक लाभ लाभार्थियों तक पहुंचना ही सफलता का पैमाना है।” उन्होंने बताया कि गौशाला संचालकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे गौवंश संरक्षण एवं संवर्द्धन के कार्य को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकें।
डॉ. देवेन्द्र जुनेजा ने विभागीय ऑनलाइन वेब पोर्टल पर संचालित अनुदान सहायता योजना, राजस्थान गौशाला अधिनियम-1960 में पंजीयन प्रक्रिया और आवेदन की विधि पर विस्तार से चर्चा की। वहीं डॉ. मनोज कुमार ने निधि नियम, अनुदान दिशा-निर्देश एवं ग्राम पंचायत गौशाला/पशु आश्रय स्थल जनसहभागिता योजना से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी।
डॉ. अनिल कौशिक ने नंदीशाला जनसहभागिता योजना तथा निराश्रित गौवंश को राजमार्गों, सड़कों और खुले खेतों से गौशालाओं में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। डॉ. आरती श्रीवास्तव ने गौशाला विकास योजना के ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से मिलने वाले प्रावधानों की जानकारी दी, जबकि डॉ. अशोक सुवालका ने राजस्थान गौशाला अधिनियम-1960 के तहत गौवंश के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में गोपालन निदेशक डॉ. शालिनी शर्मा ने विभाग की अन्य प्रमुख योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण सत्र गौशालाओं के प्रबंधन को सुदृढ़ करने और गौसंवर्धन के प्रयासों को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे।