आर बी चतुर्वेदी/ ब्यूरो चीफ़ महाराष्ट्र
चार जहाजों की परियोजना के तहत ‘संशोधक’ अंतिम सर्वेक्षण पोत भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल
दिनांक: 31 मार्च 2026
कोलकाता/ मुंबई ।भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ द्वारा डिजाइन किए गए और कोलकाता स्थित ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड’ (GRSE) द्वारा निर्मित, ‘सर्वेक्षण पोत (बड़े)’ श्रेणी का अंतिम जहाज ‘संशोधक’ (यार्ड 3028), 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है।
परियोजना का विवरण और इतिहास
चार सर्वेक्षण (बड़े) जहाजों के निर्माण का अनुबंध 30 अक्टूबर 2018 को किया गया था। इस श्रेणी के पिछले तीन जहाज पहले ही सेवा में शामिल हो चुके हैं:
- आईएनएस संधायक: 03 फरवरी 2024
- आईएनएस निर्देशक: 18 दिसंबर 2024
- आईएनएस ईक्षक: 06 नवंबर 2025
जहाज की क्षमताएं और कार्य
’सर्वेक्षण (बड़े) जहाज’ (SVL) का निर्माण ‘इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग’ के वर्गीकरण नियमों के अनुसार किया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- जल सर्वेक्षण: यह बंदरगाहों, उनके प्रवेश द्वारों और तटीय व गहरे पानी के क्षेत्रों का विस्तृत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने में सक्षम है।
- नौवहन मार्ग: यह सुरक्षित समुद्री नौवहन मार्ग निर्धारित करने में मदद करेगा।
- डेटा संग्रह: रक्षा और नागरिक उद्देश्यों के लिए समुद्र विज्ञान (Oceanographic) और भू-भौतिकीय (Geophysical) डेटा एकत्र करना इसकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
तकनीकी विशेषताएं
- वजन और लंबाई: लगभग 3400 टन वजन और 110 मीटर लंबा।
- उपकरण: इसमें ‘डेटा अधिग्रहण और प्रसंस्करण प्रणाली’, ‘स्वायत्त पानी के नीचे वाहन’ (AUV), ‘रिमोटली संचालित वाहन’ (ROV), ‘DGPS लॉन्ग-रेंज पोजिशनिंग सिस्टम’ और ‘डिजिटल साइड स्कैन सोनार’ जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं।
- गति: दो डीजल इंजनों द्वारा संचालित यह जहाज 18 नॉट्स से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
’संशोधक’ का निर्माण कार्य जून 2022 में शुरू हुआ था और जून 2023 में इसे लॉन्च किया गया। समुद्र में कड़े परीक्षणों के बाद इसे नौसेना को सौंपा गया है।
- स्वदेशी सामग्री: इस जहाज में लागत के आधार पर 80% से अधिक स्वदेशी पुर्जों का उपयोग किया गया है।
- यह उपलब्धि भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और भारतीय उद्योगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
