नरेश गुनानी
जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें याद करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को ‘अतुल्य’ बताया। देवनानी ने स्पष्ट किया कि बाबा साहेब के सामाजिक न्याय और समानता के विचार आज भी राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य हैं।
1. “संविधान: भारत के गौरवशाली इतिहास का दर्पण”
देवनानी ने संविधान की एक विशिष्ट विशेषता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हमारा संविधान न केवल अधिकारों की पुस्तक है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी संवाहक है।
संविधान के 22 भागों के मुखपृष्ठ पर अंकित प्रमुख गौरव-प्रतीक:
- धार्मिक एवं आध्यात्मिक: गीता का उपदेश देते श्रीकृष्ण, लंका विजय के बाद लौटते भगवान श्री राम और बुद्ध का जीवन दर्शन।
- ऐतिहासिक वैभव: सम्राट अशोक, न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य का दरबार और नालंदा विश्वविद्यालय।
- शौर्य और बलिदान: छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविन्द सिंह, रानी लक्ष्मीबाई और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस।
- प्राचीन जड़ें: मोहनजोदड़ो सभ्यता और वैदिक गुरुकुल।
2. स्वतंत्रता के संघर्ष की परिणति
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का संविधान उन लाखों भारतीयों की आशाओं का प्रतीक है जिन्होंने स्वतंत्रता, न्याय और समानता का सपना देखा था। उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, वीर सावरकर और डॉ. अम्बेडकर जैसे महापुरुषों की संयुक्त दृष्टि को इस लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव बताया।
”डॉ. अम्बेडकर ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ संवैधानिक तत्वों को भारतीय मूल्यों के साथ पिरोया, जिससे एक अद्भुत और तर्कसंगत दस्तावेज तैयार हुआ।”
— वासुदेव देवनानी
3. जोधपुर प्रवास: IIT कैंपस में अम्बेडकर जयंती समारोह
मंगलवार, 14 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष जोधपुर के दौरे पर रहेंगे। उनके कार्यक्रम की मुख्य बातें:
- मुख्य अतिथि: देवनानी जोधपुर स्थित IIT कैंपस में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष समारोह को संबोधित करेंगे।
- शैक्षणिक अवलोकन: समारोह के पश्चात वे IIT कैंपस का भ्रमण कर वहां की शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा भी लेंगे।
- प्रमुख उद्देश्य: युवाओं के बीच बाबा साहेब के संघर्षों और उनके द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।