संगम विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दीक्षांत को बताया जीवन का नया अध्याय
भीलवाड़ा/जयपुर | 20 फरवरी, 2026
| गौरव कोचर
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को भीलवाड़ा स्थित संगम विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। बतौर मुख्य अतिथि समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता और बौद्धिक क्षमता को आधुनिक समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान पर जोर
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बौद्धिक क्षमता और गुणवत्ता युक्त शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान किया कि वे केवल डिग्री बांटने तक सीमित न रहें, बल्कि अनुसंधान (Research), नवाचार (Innovation) और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करें।
”शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह मानवीय व्यवहार और आचरण को बेहतर बनाने में अमूल्य साबित होती है।” – हरिभाऊ बागडे, राज्यपाल
राष्ट्र निर्माण के तीन स्तंभ: ज्ञान, कौशल और चरित्र
राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति ज्ञान, कौशल और चरित्र के आधार स्तंभों पर टिकी होती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से इन मूल्यों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन मूल्यों का उल्लेख करते हुए सभी को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया।
आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत
देश की प्रगति पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि:
- देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
- आज बड़े सैन्य उपकरण और भारी मशीनरी का निर्माण स्वदेशी स्तर पर हो रहा है।
- आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
पदक और उपाधियों का वितरण
समारोह के दौरान शैक्षणिक सत्र 2024-25 के प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया:
- स्वर्ण पदक: स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा के 30 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए।
- शोध उपाधियां: 31 शोधार्थियों (PhD) को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की गईं।
राज्यपाल ने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह किसी शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक नए और चुनौतीपूर्ण अध्याय में प्रवेश का द्वार है।
