श्री पुष्कर मेला 2025 का विधिवत शुभारंभ आज, ध्वजारोहण के साथ होंगे अनेक रंगारंग कार्यक्रम

श्री पुष्कर मेला 2025 का विधिवत शुभारंभ आज, ध्वजारोहण के साथ होंगे अनेक रंगारंग कार्यक्रम

पुष्कर/अजमेर, 30 अक्टूबर (हरिप्रसाद शर्मा)।
विश्वप्रसिद्ध श्री पुष्कर मेला 2025 का आज गुरुवार सुबह 10 बजे ध्वजारोहण समारोह के साथ विधिवत शुभारंभ होगा। परंपरा, संस्कृति और उत्सव के संगम का प्रतीक यह मेला इस वर्ष कई विशेष आकर्षणों के साथ प्रारंभ हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, मेले के उद्घाटन अवसर पर राजस्थान की उप मुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी द्वारा ध्वजारोहण किए जाने की संभावना है। समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, देश-विदेश से आए पर्यटक, अधिकारी एवं कलाकार भाग लेंगे।

ध्वजारोहण के साथ ही 101 नगाड़ा वादक सामूहिक प्रस्तुति देकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करने का प्रयास करेंगे। नगाड़ों की यह अनूठी गूंज पुष्कर की पवित्र वादियों में परंपरा और उल्लास की गूंज भर देगी।

इसके बाद स्कूली छात्राओं द्वारा मांडना प्रतियोगिता और समूह नृत्य प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसमें राजस्थान की लोक संस्कृति और कला की झलक देखने को मिलेगी। दोपहर में चक दे राजस्थान थीम पर आधारित फुटबॉल मैच स्थानीय टीम और विदेशी पर्यटकों की टीम के बीच खेला जाएगा, जो मेला मैदान का विशेष आकर्षण रहेगा।

शाम होते ही पुष्कर सरोवर घाटों पर दिव्यता और भक्ति का अनोखा संगम दिखाई देगा। शाम 6 बजे दीपदान कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसके तहत हजारों दीपकों से सरोवर जगमगाएगा। इसके साथ ही घाटों पर रंगोली सजाई जाएगी। शाम 6:30 बजे पुष्कर महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होंगे।

रात्रि में ‘पुष्कर की आवाज’ कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। शाम 7 बजे हास्य कार्यक्रम और लोकनृत्य, लोकगीत सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला पूरे वातावरण को उल्लासमय बनाए रखेगी।

पुष्कर मेला, जो परंपरागत रूप से भक्ति, संस्कृति, पशु व्यापार और पर्यटन का संगम माना जाता है, आगामी दिनों में भी अनेक आकर्षक कार्यक्रमों से गुलजार रहेगा। प्रशासन और आयोजन समिति ने मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी चाक-चौबंद हैं।

पुष्कर के ऐतिहासिक मेले की शुरुआत के साथ ही राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर रंगों, संगीत और अध्यात्म से सरोबार होने जा रही है।

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