श्रीराम मेरे आदर्श, अनुभवों से मिली प्रेरणा और संस्कृति बचाने का लक्ष्य — कैलाश खेर

श्रीराम मेरे आदर्श, अनुभवों से मिली प्रेरणा और संस्कृति बचाने का लक्ष्य — कैलाश खेर

रायगढ़, 7 सितंबर। गणपत चौहान ब्यूरो चीफ़ छत्तीसगढ़, टेलीग्राफ टाइम्स।
मशहूर बॉलीवुड सिंगर कैलाश खेर ने रायगढ़ की सादगी और अपनत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर उनके दिल के बेहद करीब हो गया है। शुक्रवार रात चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। मधुर स्वर और भक्ति से परिपूर्ण गीतों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

रायगढ़ की सादगी ने जीता दिल

कैलाश खेर ने समारोह के बाद रायगढ़वासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यहाँ की आत्मीयता और संस्कृति ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सहज अंदाज में अपने जीवन दर्शन, संघर्ष और सांस्कृतिक सरोकारों को साझा किया।

जीवन दर्शन और संघर्ष की गाथा

करीब आधे घंटे की प्रेस वार्ता में कैलाश खेर ने अपने संघर्षमय जीवन से लेकर पारिवारिक मूल्यों, श्रीराम के प्रति अनुराग, देश प्रेम और संस्कृति संरक्षण तक कई मुद्दों पर बेबाकी से विचार रखे। उन्होंने बताया कि कठिन हालातों और चुनौतियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत कर सपनों को पूरा किया।
उन्होंने कहा—
“भारत का गौरव तभी बढ़ सकता है जब हम अपनी संस्कृति को विकृति से बचाकर आगे बढ़ाएँ। संस्कृति हमारी पहचान है और हमें इसे सहेजने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।”

कैलाश खेर अकादमी का उद्देश्य

कैलाश खेर ने अपनी अकादमी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अकादमी का लक्ष्य कला के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाना है। यहां छात्रों को संगीत, नृत्य और अन्य कलाओं की शिक्षा दी जाती है, जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें।
उन्होंने कहा कि हमें पश्चिम से तकनीक और अनुशासन सीखना चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति और धरोहर को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। बतौर कलाकार वे न केवल कला के उज्जवल भविष्य के लिए काम कर रहे हैं, बल्कि स्वार्थमय दौर में गुम होती मानवता को भी नये सिरे से जगाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

श्रीराम और अनुभवों से मिली प्रेरणा

कैलाश खेर ने बताया कि उनके आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं और उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके अनुभव हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर परिस्थिति से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
“तन अनुरागी और मन बैरागी” की जीवनशैली को जीते हुए उन्होंने अपने भीतर के कलाकार और भक्त दोनों को संतुलित रखा है। उन्होंने एक अनूठा प्रसंग साझा किया कि संघर्ष के दिनों में जब उन्होंने घर छोड़ा, तब माता के हाथ के मिष्ठान्न को आखिरी बार खाकर प्रण लिया था कि अब जीवनभर कोई मिठाई नहीं खाएँगे—और यह व्रत आज भी निभा रहे हैं।

संगीत और भक्ति का संगम

कैलाश खेर ने कहा कि संगीत उनकी रुचि है, लेकिन उनका मन श्रीराम चरणों में ही रमता है। उनका मानना है कि जो स्वयं जगता है, वही दूसरों को भी जगाने का सामर्थ्य रखता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सफलता पाने वाले हर व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है कि वह दूसरों को रास्ता दिखाए और प्रेरणा का स्रोत बने।

 

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