श्रावण शिवरात्रि पर जलाभिषेक का विशेष योग, भद्रा दोष से नहीं घबराएं – श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज
रिपोर्ट: : हरि प्रसाद शर्मा / गाजियाबाद
By : सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 22,2025
ग़ाज़ियाबाद। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, साथ ही दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने 23 जुलाई बुधवार को पड़ने वाली श्रावण शिवरात्रि को लेकर बड़ा आध्यात्मिक संदेश दिया है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया है कि वे किसी भी समय भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं—चाहे भद्रा हो या अन्य कोई योग—भगवान शिव की कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होगी।
भद्रा दोष से नहीं होता भगवान पर कोई असर
महाराजश्री ने बताया कि प्रातः 5:37 से दोपहर 3:31 तक भद्रा वास योग रहेगा, जिसे आमतौर पर शुभ कार्यों में बाधा माना जाता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान शिव स्वयं मृत्युंजय और कालों के भी काल महाकाल हैं। इसलिए उन पर किसी भी भौतिक योग या भद्रा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। “ग्रह-नक्षत्र का प्रभाव मनुष्य पर हो सकता है, पर ईश्वर पर नहीं,” उन्होंने दोहराया।
पूरे दिन-रात कर सकते हैं पूजन-अभिषेक
उन्होंने कहा कि श्रावण शिवरात्रि पर प्रातः 4 बजे से रात्रि 2 बजे तक कभी भी भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक किया जा सकता है। “जब भी समय मिले, एक लोटा जल चढ़ा दें, भोलेनाथ उसी में प्रसन्न हो जाएंगे और वह फल देंगे जो वर्षों की तपस्या के बाद भी कठिन होता है,” उन्होंने कहा।
विशेष संयोग बना रहे हैं इस बार
इस बार की शिवरात्रि और भी विशेष है क्योंकि एक साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, गजकेसरी योग, नवपंचम योग और बुधवारी श्रावण शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ है।
शिव-पार्वती पुनर्मिलन का दिन
श्रावण शिवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इस कारण इस दिन शिव-पार्वती दोनों की पूजा कर भक्त वैवाहिक सुख, सौभाग्य, संतान, आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं।
भक्तों से विशेष आग्रह
श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने भक्तों से आग्रह किया कि वे किसी भी संशय या भ्रामक जानकारी में न पड़ें। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का पूजन करें। उन्होंने कहा, “श्रद्धा से किया गया एक जलाभिषेक भी शिव को प्रिय होता है। और जब विशेष योग में किया जाए, तो उसका फल असंख्य गुना बढ़ जाता है।”

