श्रावण माह में कांवड़ यात्रा के दौरान अलवर के राजगढ़ क्षेत्र में विवाद, एक घंटे तक सड़क जाम

श्रावण माह में कांवड़ यात्रा के दौरान अलवर के राजगढ़ क्षेत्र में विवाद, एक घंटे तक सड़क जाम
सूरेर गांव के पास स्कूटी सवार से टक्कर के बाद टूटी कांवड़, श्रद्धालुओं ने जताया आक्रोश

By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 22,2025

राजगढ़ (अलवर), मंगलवार:
श्रावण माह के दौरान शिवभक्तों की आस्था की प्रतीक कांवड़ यात्रा में मंगलवार को एक अप्रिय घटना सामने आई। अलवर जिले के राजगढ़-बांदीकुई मार्ग पर स्थित सूरेर गांव के पास एक स्कूटी सवार युवक ने कांवड़ लेकर जा रहे एक श्रद्धालु को टक्कर मार दी, जिससे उसकी कांवड़ खंडित हो गई। इस हादसे से नाराज होकर कांवड़ियों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया और रास्ता पूरी तरह से जाम कर दिया।

घटना का विवरण:

मंगलवार सुबह बांदीकुई की ओर जा रहे कांवड़िए जब सूरेर गांव से गुजर रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार स्कूटी सवार युवक ने एक श्रद्धालु को जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर में श्रद्धालु के कंधे पर रखी कांवड़ का पवित्र जलघड़ा फूट गया, जिसे कांवड़ यात्रा में अत्यंत धार्मिक माना जाता है। घटना के बाद कांवड़ियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तुरंत सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया।

सड़क पर एक घंटे तक रहा जाम:

कांवड़ियों ने करीब एक घंटे तक रास्ता अवरुद्ध रखा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी श्रद्धालु टूटे हुए कांवड़ के मामले को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए दोषी युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।

प्रशासन ने मौके पर संभाली स्थिति:

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। नीमला के पूर्व सरपंच तुलसीदास और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे और श्रद्धालुओं को समझाने का प्रयास किया। पूर्व सरपंच तुलसीदास ने बताया कि कांवड़िए सोमवार रात गोठ की चौकी पर लगे शिविर में रुके हुए थे और मंगलवार सुबह अपनी यात्रा फिर से शुरू की थी। हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत एक नई कांवड़ की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं से यात्रा दोबारा शुरू करने की अपील की।

मामला शांत, आरोपी की पहचान:

अधिकारियों की समझाइश और नई कांवड़ मिलने के बाद कांवड़ियों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने रास्ता खाली किया। पुलिस ने स्कूटी सवार युवक की पहचान कर ली है और उससे पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़ी पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

आस्था और अनुशासन दोनों जरूरी:

यह घटना दर्शाती है कि श्रावण मास में श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं। प्रशासन, आमजन और यातायात साधनों से जुड़े सभी लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है ताकि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।


 

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