राजस्थान
श्रावण मास के प्रथम दिन हरिद्वार से जयपुर तक कांवड़ यात्रा हुई रवाना
भक्तों ने गंगाजल लेकर भगवान शिव के अभिषेक का लिया संकल्प
Edited By : लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 11,2025
जयपुर, 11 जुलाई 2025
श्रावण मास की पुण्य बेला पर आस्था की गंगा एक बार फिर हरिद्वार से बह निकली है। श्रद्धा और विश्वास से ओतप्रोत श्रद्धालुओं का जत्था शुक्रवार को हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा के लिए जयपुर की ओर रवाना हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक कर प्रदेशवासियों के लिए उत्तम वर्षा, सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करना है।
इस बार की कांवड़ यात्रा विशेष रूप से भव्य और संगठित रूप में आयोजित की जा रही है। हरिद्वार से प्रारंभ होकर यह यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए बसों के माध्यम से जयपुर पहुंचेगी, जहाँ हनुमान नगर विस्तार स्थित पवन वाटिका पार्क में सामूहिक शिव अभिषेक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
धार्मिक प्रेरणा और संगठनात्मक सहयोग
यात्रा का आयोजन प्रेरणा स्रोत प्रातःस्मरणीय गुरु महाराज श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज (सांसद, उन्नाव), मेजर जनरल आशु सिंह राठौड़ लाछड़ी (AVSM, राष्ट्रपति द्वारा दो बार सम्मानित, मारवाड़ गौरव) एवं मेवाड़ के ठाकुर साहब कुंदन सिंह सोलंकी आमेट की प्रेरणा से संभव हो सका।
मुख्य सहभागिता
इस धार्मिक यात्रा में खातीपुरा व्यापार मंडल अध्यक्ष भवानी सिंह राठौड़, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरोज कंवर, लघु भ्राता की धर्मपत्नी रमा कंवर, सांगानेर पंचायत समिति प्रधान श्रीमती भंवर कंवर, पूर्व सरपंच ठाकुर महावीर सिंह राजावत, हिम्मत सिंह कसूंबी, पंडित नरेंद्र शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु श्रद्धाभाव से शामिल हुए हैं।
जयपुर में होगा शिव अभिषेक
जयपुर आगमन के बाद पवन वाटिका पार्क में भगवान शिव का सामूहिक जलाभिषेक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय नागरिक, महिलाएं, पुरुष, वरिष्ठजन और युवा बड़ी संख्या में भाग लेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि प्रदेश और देश की खुशहाली के लिए एक सार्वजनिक प्रार्थना भी होगी।
श्रद्धा और समर्पण का संगम
श्रावण मास के शुभारंभ पर इस प्रकार की कांवड़ यात्रा न केवल सनातन परंपरा को सजीव करती है, बल्कि सामूहिक आध्यात्मिक चेतना को भी जागृत करती है। गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करना न केवल धार्मिक कर्म है, बल्कि लोक कल्याण की कामना का भी प्रतीक है।