सरकारी स्कूलों के प्रति सोच बदलने और शैक्षणिक सुधार के लिए मार्गदर्शक बनेगी अनुपमा गुप्ता की नई पुस्तक
नेहा रंजन/ झारखंड/सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर समाज में बनी पारंपरिक और नकारात्मक धारणाओं के बीच ‘फर्श से अर्श तक – एक सरकारी विद्यालय की प्रेरक यात्रा’ नाम की पुस्तक आशा, नवाचार और सकारात्मक बदलाव की एक नई किरण बनकर सामने आई है। प्रसिद्ध शिक्षाविद रीतेश रंजन के अनुसार, यह पुस्तक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सही नीयत, कुशल नेतृत्व और सामूहिक प्रयास हों, तो सरकारी स्कूल भी गुणवत्ता और उत्कृष्टता के नए प्रतिमान स्थापित कर सकते हैं।
लेखिका के जमीनी अनुभवों का निचोड़
इस पुस्तक की लेखिका अनुपमा गुप्ता हैं, जिन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभवों और शैक्षणिक यात्रा को अत्यंत ही सरल और प्रभावशाली ढंग से इसमें पिरोया है।
पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रीतेश रंजन ने साझा किया कि उन्हें लेखिका के साथ विभिन्न शैक्षणिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया:
“प्रशिक्षणों के दौरान शिक्षा के प्रति अनुपमा गुप्ता का समर्पण, नवाचारी दृष्टिकोण और विद्यालयों में धरातलीय बदलाव लाने की कर्मनिष्ठा स्पष्ट दिखाई देती है। पुस्तक के हर अध्याय में उनके अनुभवों और शिक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की झलक मिलती है।”
पुस्तक के मुख्य बिंदु एवं विशेषताएं
’फर्श से अर्श तक’ केवल एक स्कूल के कायाकल्प की कहानी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न स्तंभों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है:
- सर्वांगीण विकास पर जोर: विद्यार्थियों के केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनके समग्र व्यक्तित्व विकास के व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं।
- सामुदायिक सहभागिता: विद्यालय के विकास में स्थानीय समाज और अभिभावकों को जोड़ने के सफल तरीकों को रेखांकित किया गया है।
- सशक्त विद्यालय नेतृत्व: एक विद्यालय प्रमुख (हेडमास्टर/प्रधानाचार्य) कैसे अपनी टीम को प्रेरित करके बड़े बदलाव ला सकता है, इसका सजीव वर्णन है।
- नवाचार (Innovations): सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षण की आधुनिक और रोचक विधियों का उपयोग कैसे किया जाए, इसकी दिशा दिखाई गई है।
नई शिक्षा नीति (NEP) के दौर में प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जब देश भर में नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, तब यह पुस्तक शिक्षा-जगत के लिए एक ‘मार्गदर्शिका’ (Guiding Light) का काम करती है। यह पुस्तक शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों में यह विश्वास जगाती है कि वे स्वयं बदलाव के संवाहक बन सकते हैं।
शिक्षा से जुड़े हर व्यक्ति के लिए पठनीय
रीतेश रंजन का मानना है कि यह पुस्तक केवल एक विद्यालय की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति है कि सही दिशा में किए गए प्रयास से सरकारी स्कूल भी समाज में उत्कृष्टता का नया इतिहास रच सकते हैं। यही कारण है कि यह पुस्तक प्रत्येक शिक्षक, स्कूल प्रधान, प्रशिक्षक और शिक्षाप्रेमी के लिए अवश्य पठनीय है।