शिक्षण कार्य हमारे लिए एक मिशन : रीतेश

शिक्षण कार्य हमारे लिए एक मिशन : रीतेश

गोड्डा (झारखंड), 05 सितम्बर। नेहा रंजन झारखंड/ टेलीग्राफ टाइम्स।
शिक्षक दिवस के अवसर पर गोड्डा जिला अंतर्गत महागामा प्रखंड के मध्य विद्यालय चिल्हा के सहायक शिक्षक रीतेश ने कहा कि “मेरे लिए शिक्षण कार्य केवल जीवन यापन का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का एक मिशन है।”

रीतेश पिछले 17 वर्षों से विद्यालय में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों का गौरवपूर्ण इतिहास आदिकाल से रहा है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसी विभूतियों के योगदान ने शिक्षा जगत को नई दिशा दी है। उन्हीं की प्रेरणा से शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं।

रीतेश का कहना है कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों और निराशाजनक परिदृश्य के बावजूद शिक्षक अपने सरकारी दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक सरोकार के कार्यों को भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। “हम दीपक की तरह जलकर अपने छात्रों के भविष्य को रोशन करना चाहते हैं। यह बच्चों को जीवन पथ पर अग्रसर करने और उन्हें समाज का कुशल नागरिक बनाने का प्रयास है,” उन्होंने कहा।

रीतेश न केवल अध्यापन कार्य में बल्कि शैक्षिक गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे परिवर्तन दल और निष्ठा दल के सदस्य हैं। इसके अलावा रिसोर्स पर्सन, ज्ञानसेतु एवं एफएलएन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के फैसिलिटेटर और अनुश्रवण दल के सदस्य भी हैं। बतौर प्रशिक्षक वे अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन कर चुके हैं, जिसमें सहकर्मी शिक्षकों को दिशा देने का कार्य किया है।

शिक्षा के प्रति अपनी सोच साझा करते हुए उन्होंने कहा, “शिक्षा व्यवसाय नहीं बल्कि सहनशील, विवेकपूर्ण और विकसित समाज निर्माण का पहला कदम है। यह केवल रोजगार नहीं, बल्कि एक महायज्ञ है, जिसमें हम शिक्षक दीपक बनकर योगदान दे रहे हैं।”

रीतेश ने बताया कि सतत अध्ययनशील रहना ही उनकी ताकत है। इससे उन्हें न केवल अध्यापन में बल्कि शिक्षक-छात्र, शिक्षक-अभिभावक और शिक्षक-प्रशासन के बीच सामंजस्य स्थापित करने में भी मदद मिली है। विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर भी उनके प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और विद्यालय को अच्छी ग्रेडिंग प्राप्त हुई है।

अंत में रीतेश ने कहा कि शिक्षण कार्य उनके जीवन का उद्देश्य बन चुका है। “जीवन का शेष भाग भी मैं इसी ज्ञान यज्ञ को समर्पित करना चाहता हूं। शिक्षा ही गरीब और वंचित वर्ग के लिए उम्मीद की किरण है और मैं इस मिशन का एक साधारण माध्यम हूं।”

 

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