योगेश शर्मा
जयपुर। गुलाबी नगरी के कला प्रेमियों के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहा। जयपुर संगीत महाविद्यालय की ओर से शास्त्रीनगर स्थित साइंस पार्क में दो दिवसीय ‘जयपुर म्यूजिक फेस्टिव’ का रंगारंग शुभारंभ हुआ। कला, संस्कृति और सामाजिक संदेशों से सराबोर इस महोत्सव के पहले ही दिन देश और प्रदेश के प्रतिभावान कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्जवलन से हुआ आगाज
संगीत महोत्सव का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद जयपुर महानगर अध्यक्ष राजेन्द्र मीणा, विशिष्ट अतिथि विहिप प्रांत सत्संग प्रमुख कुलदीप, शिक्षाविद आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया, वरिष्ठ नृत्यकार पं. राजेन्द्र राव और नृत्य आंगन की डायरेक्टर अदिति सोगानी ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजेन्द्र मीणा ने कलाकारों और दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि यह आत्मा को छूने और मन के तारों को झंकृत करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में संगीत और कला के महत्व को रेखांकित किया।
राष्ट्रभक्ति और शास्त्रीय कलाओं का अनूठा संगम
महोत्सव के उद्घाटन सत्र की शुरुआत जयपुर संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा दी गई राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विशेष प्रस्तुतियों से हुई। विद्यार्थियों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘मां तेरे चरणों में नमन’ जैसे गीतों पर सामूहिक प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
जयपुर संगीत महाविद्यालय के निदेशक डॉ. रामलाल शर्मा ने बताया कि फेस्टिवल के पहले दिन गायन, वादन एवं नृत्य की सभी प्रमुख विधाओं की करीब डेढ़ सौ (150) प्रस्तुतियां मंच पर उतरीं। इनमें:
- शास्त्रीय और सुगम संगीत: शास्त्रीय गायन और वाद्यों की मधुर जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
- शास्त्रीय नृत्य: कथक और भरतनाट्यम की सधी हुई प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
- लोक संस्कृति: राजस्थान के पारंपरिक और जीवंत लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
कला के जरिए दिया सामाजिक जागरूकता का संदेश
इस म्यूजिक फेस्टिवल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें कला के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया। महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण, ‘बेटी बचाओ’ अभियान और राष्ट्रहित से जुड़े विशेष गीतों व सामूहिक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने मंच पर अपनी कला का जादू बिखेरने वाले होनहार कलाकारों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। जयपुर संगीत महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस भव्य संगीत उत्सव का विधिवत समापन 24 मई को दोपहर एक बजे विशेष प्रस्तुतियों और पुरस्कार वितरण के साथ होगा।