शहरी सेवा शिविर में डिनोटिफाइड कच्ची बस्ती वाशिंदों ने उठाई भूमि अधिकार पट्टों की मांग

शहरी सेवा शिविर में डिनोटिफाइड कच्ची बस्ती वाशिंदों ने उठाई भूमि अधिकार पट्टों की मां

रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर, संपादन सुनील शर्मा, टेलीग्राफ टाइम्स।

पुष्कर/अजमेर, 18 सितम्बर। राज्य सरकार की ओर से आयोजित शहर सेवा शिविर में गुरुवार को पुष्कर की सात सर्वेशुदा एवं डिनोटिफाइड कच्ची बस्तियों के वाशिंदों ने भूमि अधिकार पट्टों की पुरजोर मांग उठाई। शिविर में पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं और पार्षद प्रतिनिधियों ने नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री के नाम पुनः स्मरण पत्र सौंपते हुए गरीब परिवारों को राहत देने की अपील की।

पिछले 30 से 40 वर्षों से लगभग 1500 गरीब परिवार इन बस्तियों में मकान बनाकर निवास कर रहे हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने पुष्कर, नाथद्वारा, जैसलमेर, माउंट आबू जैसे शहरों में कच्ची बस्तियों को पट्टा दिए जाने पर रोक लगा रखी थी, जिससे वाशिंदे अब तक भूमि अधिकार से वंचित हैं।

दो वर्ष पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पाराशर, बस्तीवासियों और जागरूक पार्षदों के प्रयासों से बस्तियों का सर्वे कर गजट नोटिफिकेशन जारी करवाया गया और इन्हें डिनोटिफाइड घोषित किया गया। इसके बाद नगर परिषद ने विशेष कैंप लगाकर 941 परिवारों के आवेदन एकत्र किए, जिनमें से 857 परिवारों को पट्टा पाने योग्य माना गया। प्रथम चरण में सात में से दो बस्तियों की लगभग 105 पत्रावलियां परिषद ने 11 सितम्बर 2023 को राज्य सरकार को भूमि नियमन स्वीकृति हेतु भेजीं, लेकिन आज तक निस्तारण लंबित है।

इस मामले में अधिकारियों ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने 110 से 200 वर्गगज तक अतिरिक्त कब्जे वाले भूखंडों के पट्टे डीएलसी दर अथवा आरक्षित दर में से कम दर पर 10 प्रतिशत की दर से देने का प्रावधान किया था। लेकिन सरकार बदल जाने के बाद नई दर निर्धारण नहीं हो पाया, जिससे प्रक्रिया अटकी हुई है।

गुरुवार को शिविर में सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पाराशर, पूर्व पार्षद जय नारायण दगदी, बैजनाथ पाराशर, नारायण दायमा, संजय दगदी, गोपाल तिलोनिया, गौरव दगदी, जगदीश कुमावत सहित कई जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने मंत्री के नाम स्मरण पत्र सौंपते हुए मांग की कि—

  1. डिनोटिफाइड कच्ची बस्ती वाशिंदों को भूमि अधिकार पट्टे दिए जाएं।
  2. नई दर का निर्धारण जल्द कर गरीब परिवारों को राहत प्रदान की जाए।
  3. शिविर के माध्यम से लंबित पत्रावलियों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार से शीघ्र मार्गदर्शन लेकर पट्टे जारी करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

 

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