शराब नीति मामला: केजरीवाल और सिसोदिया का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट का बहिष्कार, अब जस्टिस मनोज जैन की अदालत में होंगे पेश

नई दिल्ली: गौरव कोचर 

दिल्ली के चर्चित आबकारी नीति मामले में एक बड़ा और अप्रत्याशित कानूनी मोड़ सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार करने का फैसला किया है। अब इस मामले से जुड़े सभी कानूनी पक्षों और याचिकाओं पर सुनवाई के लिए दोनों नेता न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत के समक्ष पेश होंगे।

​कानूनी गलियारों में इस कदम को आम आदमी पार्टी की एक बड़ी और सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

​अदालत बदलने की मुख्य वजहें

​अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के कानूनी दल द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण माने जा रहे हैं:

  • अदालती फैसलों से असंतोष: सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से मिले झटकों और जांच एजेंसियों के पक्ष में आए कुछ फैसलों के बाद नेताओं के कानूनी सलाहकारों ने यह रुख अपनाया है।
  • बहिष्कार का कड़ा फैसला: कानूनी रणनीति के तहत दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे अब न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने अपनी दलीलें पेश नहीं करेंगे।
  • न्यायमूर्ति मनोज जैन पर भरोसा: मामले की निष्पक्षता और तर्कों को नए सिरे से रखने के लिए अब न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत का रुख किया गया है, जहां आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी अर्जियों पर सुनवाई होगी।

​क्या है दिल्ली शराब नीति मामला?

​यह पूरा विवाद दिल्ली सरकार की वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति (शराब नीति) से जुड़ा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति को निजी शराब व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, जिसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वत (किकबैक) ली गई थी।

​इसी मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को महीनों जेल में बिताना पड़ा था और फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। दोनों नेता और आम आदमी पार्टी शुरू से ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताते रहे हैं।

राजनीतिक और कानूनी प्रभाव: देश के इस सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक में अदालत का इस तरह बदलना बेहद दुर्लभ माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल मामले की सुनवाई की दिशा बदलेगी, बल्कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और आम आदमी पार्टी के बीच कानूनी जंग और तेज होने के आसार हैं। अब सबकी नजरें न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत में होने वाली अगली पेशी और वहां आने वाले फैसलों पर टिकी हैं।

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