शक्ति, प्रतिष्ठा और सामर्थ्य का दुरुपयोग जीवन से आनंद को कर देता है समाप्त: आचार्य राजेश्वर

शक्ति, प्रतिष्ठा और सामर्थ्य का दुरुपयोग जीवन से आनंद को कर देता है समाप्त: आचार्य राजेश्वर

| योगेश शर्मा

जयपुर। अजमेर रोड स्थित क्वींस रोड, नीलकंठ कॉलोनी के बरसाना (श्री सरस निकुंज की पीठ) में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को जीवन प्रबंधन और भक्ति के सूत्रों से जोड़ा गया। यह कथा छोटे दादा गुरुदेव शुक सम्प्रदाय पीठाधीश रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।

​शुक सम्प्रदाय पीठाधीश अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यास पीठ से डॉ. राजेश्वर ने कई प्रेरक प्रसंगों की व्याख्या की।

​शक्ति के सदुपयोग का संदेश

​कथा के दौरान डॉ. राजेश्वर ने शिव-सती प्रसंग के माध्यम से एक गंभीर जीवन दर्शन साझा किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को शक्ति, बल, प्रतिष्ठा और सामर्थ्य प्राप्त होने पर कभी भी उसका अहंकार या दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

​”यदि हम अपनी क्षमताओं का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो जीवन से मानसिक शांति और आनंद पूरी तरह समाप्त हो जाता है। सती ने जगत जननी भवानी होने के अपने सामर्थ्य का दुरुपयोग किया, परिणाम स्वरूप शिव रूपी ‘आनंद’ ने उनका साथ छोड़ दिया।”

 

​कथा के मुख्य प्रसंग

​दूसरे दिन की कथा में आचार्य ने निम्नलिखित दिव्य प्रसंगों का श्रवण कराया:

  • राम नाम की महिमा: नाम जप की शक्ति और उसकी महत्ता।
  • शिव-अगस्त्य संवाद: भगवान शिव द्वारा अगस्त्य ऋषि से राम कथा सुनना।
  • शिव-पार्वती प्रसंग: पार्वती जन्म, कामदेव का भस्म होना और शिव-पार्वती विवाह की भव्य कथा।

​संतों का सान्निध्य और सम्मान

​सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। सरस परिकर की ओर से पधारे हुए सभी संतों का अभिनंदन और सम्मान किया गया। यह कथा 9 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1:30 से शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी, जिसमें विभिन्न आचार्यों का आशीर्वाद श्रद्धालुओं को मिलेगा।

​शीतलहर के बीच पुख्ता इंतजाम

​बढ़ती ठंड को देखते हुए आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के विशेष इंतजाम किए गए हैं:

  1. अलाव की व्यवस्था: कथा स्थल के बाहर अलाव जलाए गए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु सर्दी से राहत पा सकें।
  2. हवा से बचाव: पंडाल के दरवाजों और खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाए गए हैं ताकि ठंडी हवा अंदर न आए।
  3. बैठने की व्यवस्था: फर्श की ठंड से बचाने के लिए श्रद्धालुओं के बैठने हेतु मोटे कालीन और गद्दे बिछाए गए हैं।
  4. विषय

    विवरण

    अवसर

    रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती

    वक्ता

    आचार्य डॉ. राजेश्वर

    स्थान

    नीलकंठ कॉलोनी, क्वींस रोड (अजमेर रोड)

    समय

    दोपहर 1:30 से शाम 5:00 बजे तक (9 जनवरी तक)

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