नरेश गुनानी
जयपुर | 18 अप्रैल, 2026
राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ये पर्व भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धर्मनिष्ठ जीवन मूल्यों के प्रति हमारी आस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करते हैं।
भगवान परशुराम के आदर्श: अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा
अध्यक्ष देवनानी ने भगवान परशुराम को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि विष्णु के छठे अवतार के रूप में उनका जीवन त्याग, तपस्या और शौर्य का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने समाज में न्याय और मर्यादा स्थापित करने के लिए जिस प्रकार अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया, वह संदेश आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा:
”वर्तमान चुनौतियों के समय में भगवान परशुराम के आदर्श हमें सही मार्ग दिखाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति और ज्ञान का संचय केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि लोककल्याण और समाज की भलाई के लिए होना चाहिए।”
युवाओं के लिए संदेश: चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति
वासुदेव देवनानी ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि वे भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने चरित्र का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि युवाओं को अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।
- सांस्कृतिक विरासत: युवाओं का यह दायित्व है कि वे अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखें।
- सामाजिक समरसता: बिना सामाजिक समानता और भाईचारे के किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है।
अक्षय तृतीया: सुख, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक
अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि यह पर्व सनातन परंपरा में शुभ कार्यों, दान-पुण्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कामना की कि यह मंगलमय अवसर सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।
देवनानी ने अंत में सभी से आग्रह किया कि त्योहारों के मूल संदेश को समझकर उन्हें अपने आचरण में उतारें, ताकि एक प्रगतिशील और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण हो सके।