शंकराचार्य को संगम स्नान से रोकने पर जयपुर में उबाल, 27 जनवरी को निकलेगी ‘प्रतिकार यात्रा’
| योगेश शर्मा
जयपुर। मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज संगम में ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से रोकने और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर शनिवार को जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में गौमाता राष्ट्र माता अभियान और गो-संसद के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में इस कृत्य को सनातन धर्म का अपमान और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया।
प्रशासन को चेतावनी: सार्वजनिक माफी मांगें या आंदोलन झेलें
गौमाता राष्ट्रमाता अभियान और गो-संसद के पदाधिकारियों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन ने शीघ्र सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो 27 जनवरी को सुबह 9 बजे जयपुर के आराध्य गोविंद देवजी मंदिर से कलेक्ट्रेट तक विशाल ‘प्रतिकार यात्रा’ निकाली जाएगी। इस यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत और आमजन शामिल होंगे। दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
प्रशासन के दावों पर सवाल
बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने पुलिस और प्रशासन के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया:
- असंवैधानिक रोक: अभियान के प्रभारी बाबूलाल जांगिड ने कहा कि शंकराचार्य एक प्राचीन मठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें बिना किसी लिखित आदेश या निषेधाज्ञा के रोकना पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है।
- प्रोटोकॉल का बहाना: गो-संसद के प्रदेश सह प्रभारी ताराचंद कोठारी ने बताया कि प्रशासन ने भीड़ का हवाला देकर उन्हें रोका, जबकि वीडियो फुटेज दिखाते हैं कि वहां कोई असामान्य स्थिति नहीं थी। उसी समय अन्य समूहों को स्नान की अनुमति दी गई थी।
- मानवाधिकार उल्लंघन: प्रदेश सह सचिव देवकीनंदन पुरोहित ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य को अज्ञात लोगों द्वारा घेरकर किसी अनजान स्थान पर ले जाया गया, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का हनन है।
- अमानवीय व्यवहार: जयपुर गौ सांसद सुरेंद्र सिंह अचलपुरा ने बताया कि शंकराचार्य के शिष्यों, जिनमें महिलाएं और वृद्ध शामिल थे, के साथ बल प्रयोग किया गया। एक वीडियो में पुलिसकर्मी को साधु की चोटी पकड़कर घसीटते हुए भी देखा गया है।
आंदोलनकारियों की 7 प्रमुख मांगें
- घटना पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण और बिना शर्त माफी मांगी जाए।
- संगम स्नान रोकने से संबंधित सभी लिखित आदेश सार्वजनिक किए जाएं।
- वीडियो में मारपीट करते दिख रहे पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए।
- पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष समयबद्ध जांच हो।
- सीसीटीवी, ड्रोन रिकॉर्डिंग और वायरलेस लॉग सुरक्षित किए जाएं।
- संज्ञेय अपराध सिद्ध होने पर दोषियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज हो।
- भविष्य में साधु-संतों के सम्मान की सुरक्षा हेतु स्पष्ट गाइडलाइन जारी हो।
बैठक में उपस्थित गणमान्य
बैठक में योगेंद्र सिंह, संतलाल सैनी, पं. गजानंद शर्मा, विनोद यादव, भगवान लाल सेन, आशीष मीणा और गौसेवक ओमप्रकाश सहित कई पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त किया और सनातन परंपराओं की रक्षा का संकल्प लिया।

