बेंगलुरु/ सुनील शर्मा/भारत ने अपनी डिजिटल संप्रभुता और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बेंगलुरु के जक्कुर स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (RRSL) में ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ पर आधारित ‘भारतीय मानक समय (IST) – वितरण प्रदर्शन नेटवर्क’ का औपचारिक उद्घाटन किया।
’एक देश, एक समय’ के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के तहत शुरू की गई यह पहल देश भर में एक समान, अत्यधिक सटीक और सुरक्षित समय मानक स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
विदेशी निर्भरता से मुक्ति और साइबर सुरक्षा को मजबूती
उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जोर देकर कहा कि यह नई प्रणाली जीपीएस (GPS) जैसे विदेशी समय स्रोतों पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगी। बाहरी टाइम रेफरेंस पर निर्भरता कम होने से देश का डिजिटल ढांचा अधिक सुरक्षित होगा। यह कदम बैंकिंग, रक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को साइबर हमलों और डेटा हेरफेर (डेटा मैनिपुलेशन) के जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करेगा।
यह उच्च-सटीक समय सिंक्रनाइज़ेशन तकनीक निम्नलिखित क्षेत्रों की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में क्रांतिकारी साबित होगी:
- वित्तीय बाजार और शेयर बाजार: हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और शेयर बाजारों में पारदर्शिता।
- डिजिटल बैंकिंग: ऑनलाइन भुगतान और वित्तीय लेनदेन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग।
- दूरसंचार नेटवर्क: 5G और भविष्य की टेलीकॉम सेवाओं में बेहतर कनेक्टिविटी।
- राष्ट्रीय पावर ग्रिड: ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और ब्लैकआउट की घटनाओं को रोकने में मदद।
प्रमुख तकनीकी संस्थानों का साझा प्रयास
उपभोक्ता मामले मंत्रालय का कानूनी मापविज्ञान प्रभाग (Legal Metrology Division) इस परियोजना के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। इस स्वदेशी प्रणाली को भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के आपसी सहयोग से विकसित किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL)
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL)
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)
प्रह्लाद जोशी ने बताया कि यह स्वदेशी प्रणाली वैश्विक समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) प्रोटोकॉल के पूर्ण अनुपालन में काम करती है। इससे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये समान समय प्रोटोकॉल भविष्य में भारत के प्रौद्योगिकी-संचालित डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवाओं की पारदर्शिता के लिए एक मजबूत आधार स्तंभ साबित होंगे।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे, अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा, कानूनी मापविज्ञान के निदेशक आशुतोष अग्रवाल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।