वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार: वित्त वर्ष 2026 में 7.8% रही विकास दर, FY27 में 7% रहने का अनुमान—एसएंडपी-क्रिसिल रिपोर्ट

नई दिल्ली/ गौरव कोचर/वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी आंतरिक मजबूती का जोरदार प्रदर्शन किया है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल (S&P Global-CRISIL) की ताजा संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.8 प्रतिशत की शानदार विकास दर (GDP Growth) दर्ज की है। वहीं, अगले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में देश की आर्थिक वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

​बुधवार को जारी “इंडिया फॉरवर्ड: रीइमैजिनिंग ग्रोथ” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि जैसे-जैसे देश विकास के अगले चरण में प्रवेश करेगा, विकास दर में हल्की नरमी स्वाभाविक है। हालांकि, यदि भारत अपनी मौजूदा व्यापक आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) स्थिरता को टिकाऊ और दीर्घकालिक गति में बदलने में सफल रहता है, तो वह वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बरकरार रखने की मजबूत स्थिति में रहेगा।

​घरेलू मांग और बुनियादी ढांचा बना भारत की सबसे बड़ी ढाल

​एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के प्रेसिडेंट और क्रिसिल बोर्ड के चेयरमैन यान ले पैलेक ने कहा कि भारत के पास निरंतर बुनियादी ढांचा विकास (Infrastructure Development), राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (कॉम्पिटिटिव फेडरलिज्म), गहरे पूंजी बाजार और सुदृढ़ वित्तीय मध्यस्थता के बल पर अपनी आर्थिक क्षमता को नए मुकाम पर ले जाने का बड़ा अवसर है।

​रिपोर्ट के अनुसार, कठिन अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन यह साबित करता है कि भारत की घरेलू मांग बेहद मजबूत है। देश की विकास यात्रा का अगला चरण मुख्य रूप से निवेश की रफ्तार को बरकरार रखने और प्रमुख आर्थिक संस्थानों को सुदृढ़ करने पर निर्भर करेगा।

​’बैलेंसिंग पावर’ से ‘लीडिंग पावर’ की ओर कदम, ऊर्जा सुरक्षा पर सतर्कता जरूरी

​भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) मोर्चे पर रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत वैश्विक मंच पर केवल संतुलन साधने वाली शक्ति (‘बैलेंसिंग पावर’) के दायरे से बाहर निकलकर अब एक नेतृत्वकारी शक्ति (‘लीडिंग पावर’) के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।

​हालांकि, अध्ययन में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर आगाह भी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • ​भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का आधे से अधिक आयात रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते करता है।
  • ​इस समुद्री मार्ग पर किसी भी प्रकार के भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति व्यवधान का सीधा और गंभीर असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे यह रणनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से निरंतर निगरानी का विषय है।

​डिजिटल रुपया: वित्तीय ढांचे की चौथी मजबूत परत

​रिपोर्ट में भारत की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी ‘डिजिटल रुपए’ की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। क्रिसिल और एसएंडपी के अनुसार, डिजिटल रुपया भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की चौथी अहम परत के रूप में उभर सकता है।

​यह तकनीक भविष्य में प्रोग्रामेबल मनी को संभव बनाएगी, जिससे धन के उपयोग की पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, तेजी से टोकनाइज हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशों से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) को सॉवरेन करेंसी से जोड़े रखने में डिजिटल रुपया बेहद निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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