वीजीयू में राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अइसमे’ का भव्य आगाज: आधुनिक तकनीक और नवाचार से बदलेगी भारतीय कृषि की तस्वीर

रिपोर्ट योगेश शर्मा 

जयपुर। जगतपुरा स्थित विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू) में कृषि व्यवसाय प्रबंधन विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘एग्री इनोवेशन एंड सस्टेनेबिलिटी इन मॉडर्न एग्रीकल्चर’ (अइसमे-2026) का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए 461 शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने पंजीकरण कराया है, जो आधुनिक कृषि की चुनौतियों और समाधानों पर मंथन कर रहे हैं।

उद्घाटन सत्र: परंपरा और तकनीक का संगम

​कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ गणेश वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत भाषण देते हुए कृषि संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) होशियार सिंह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कृषि में वैज्ञानिक पद्धतियों का समावेश नहीं होगा, तब तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना साकार नहीं हो सकता।

प्रमुख वक्ताओं के विचार: नीति और नवाचार

​सम्मेलन में शिक्षाविदों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने कृषि के भविष्य पर अपने विचार साझा किए:

  • डॉ. ललित के. पंवार (चेयरपर्सन, वीजीयू): सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. पंवार ने कहा कि कृषि को अब पारंपरिक व्यवसाय के बजाय एक व्यावसायिक उद्यम (Enterprise) के रूप में देखने की जरूरत है। किसान को फसल के मूल्य निर्धारण, मार्केटिंग और एक्सपोर्ट की बारीकियां सीखनी होंगी।
  • प्रो. (डॉ.) विमला दुंकवाल (कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा): मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने महिला किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
  • प्रो. (डॉ.) एन. डी. माथुर (कुलपति, वीजीयू): उन्होंने बताया कि 461 प्रतिभागियों की भागीदारी युवाओं के शोध के प्रति उत्साह को दर्शाती है। यहाँ प्रस्तुत शोधपत्र नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
  • डॉ. के. आर. बागरिया (संस्थापक उपाध्यक्ष, वीजीयू): उन्होंने वीजीयू के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि राष्ट्र के विकास में शोध के माध्यम से योगदान देना है।

आधुनिक खेती पर विशेषज्ञों का मंथन

​सम्मेलन के विशिष्ट अतिथियों में शामिल प्रो. (डॉ.) जसवीर सिंह ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही, वहीं डॉ. बी. एस. खड्डा (उप-निदेशक, केवीके मोहाली) ने ड्रोन तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई और मृदा स्वास्थ्य कार्ड को उत्पादकता बढ़ाने का मूल मंत्र बताया।

शोधपत्रों का होगा प्रकाशन

​सम्मेलन के पहले दिन विशेषज्ञों के मुख्य व्याख्यान के बाद मौखिक और पोस्टर शोध प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए सर्वश्रेष्ठ शोधपत्रों को प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा, जो शोधार्थियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

अगला पड़ाव: 10 अप्रैल को समापन

​यूनिवर्सिटी के उपकुलपति प्रो. (डॉ.) डी. वी. एस. भागवानुलु ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन के दूसरे दिन, 10 अप्रैल को भी विभिन्न तकनीकी सत्र और व्याख्यान आयोजित होंगे। कार्यक्रम का समापन एक भव्य समारोह के साथ होगा, जिसमें उत्कृष्ट शोध कार्य करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।

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