रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर
जयपुर। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हृदय रोग, मधुमेह (शुगर) और श्वसन संबंधी बीमारियाँ (NCDs) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। इन बीमारियों का सबसे घातक पहलू इनका देरी से पता चलना है। इस समस्या के समाधान और मरीजों को समय पर जाँच व उपचार उपलब्ध कराने के लिए लुपिन फाउंडेशन ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फाउंडेशन द्वारा राजस्थान के करौली और हिंडौन में दो अत्याधुनिक एनसीडी (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) कॉर्नर की शुरुआत की गई है।
नौ जिलों तक विस्तार की योजना
यह पहल केवल दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से, प्रदेश के पाँच आकांक्षी जिलों— जैसलमेर, बारां, धौलपुर और सिरोही सहित कुल नौ स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से एनसीडी कॉर्नर स्थापित किए जाएँगे। इस विस्तार का मुख्य लक्ष्य दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार की सुविधा सुनिश्चित करना है।
आधुनिक उपकरणों से लैस होंगे सेंटर
इन एनसीडी कॉर्नर्स की सबसे बड़ी विशेषता इनकी आधुनिकता है। यहाँ मरीजों को एक ही छत के नीचे निम्नलिखित सुविधाएँ मिलेंगी:
- त्वरित जाँच: ब्लड प्रेशर, शुगर, फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों की जाँच के लिए आधुनिक उपकरण।
- दक्ष स्टाफ: नर्सिंग स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे न केवल जाँच कर सकें, बल्कि मरीजों को जीवनशैली में सुधार और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक भी कर सकें।
- समान स्वास्थ्य सेवा: ‘लाइव्स प्रोग्राम’ के तहत समाज के हर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना।
विशेषज्ञों की राय
करौली जिला अस्पताल के डिप्टी कंट्रोलर डॉ. भुवनेश बंसल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “जिला अस्पतालों को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता है। एनसीडी कॉर्नर की यह शुरुआत समय पर सटीक जाँच और मरीजों की लंबे समय तक देखभाल को बेहतर बनाएगी, जिससे अंततः अस्पतालों पर बीमारियों का बोझ कम होगा।”
वहीं, लुपिन फाउंडेशन की सीएसआर प्रमुख तुषारा शंकर ने बताया कि फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य लोगों को स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर और समान स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि समुदाय के हर व्यक्ति तक इलाज पहुँच सके।”
बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राजस्थान के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के बीच के अंतर को कम करेगी। समय पर सतर्कता और जाँच न केवल जिंदगियाँ बचाएगी, बल्कि लोगों को एक स्वस्थ और समृद्ध जीवन की ओर अग्रसर करेगी।
