विश्व साइकिल दिवस: नरेंद्र मारवाल ने साइकिल चलाकर दिया पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति का संदेश

जयपुर। योगेश शर्मा/बढ़ती वैश्विक तपिश, जलवायु परिवर्तन और महानगरों में पैर पसारते वायु प्रदूषण के बीच ‘विश्व साइकिल दिवस’ के अवसर पर राजधानी जयपुर में एक अनूठी और प्रेरक पहल देखने को मिली। पर्यावरण संरक्षण की इसी मुहिम के तहत पर्यावरण प्रेमी और समाजसेवी नरेन्द्र मारवाल ने साइकिल चलाकर आमजन को प्रदूषण घटाने और सेहत सुधारने का एक बड़ा संदेश दिया।

​सफेद टी-शर्ट पहनकर सड़कों पर उतरे नरेंद्र मारवाल ने इस दौरान युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए इस इको-फ्रेंडली सवारी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया।

​संयुक्त राष्ट्र की पहल: टिकाऊ और सस्ता परिवहन है साइकिल

​समाजसेवी नरेंद्र मारवाल ने इस अवसर पर साइकिल के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:

​”संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वर्ष 2018 में आधिकारिक रूप से 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ घोषित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य साइकिल को एक बेहद सस्ते, सरल, भरोसेमंद, स्वच्छ और पर्यावरण हितैषी परिवहन के साधन के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। आज के तकनीकी और मशीनी दौर में हम अपनी इस पारंपरिक और सबसे सुरक्षित सवारी को भूलते जा रहे हैं, जबकि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए संजीवनी है।”

 

​सड़क सुरक्षा में सुधार और वाहनों के दबाव से मिलेगी मुक्ति

​बढ़ते शहरीकरण और सड़कों पर वाहनों के अनियंत्रित बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए मारवाल ने बताया कि साइकिल का उपयोग केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई सामाजिक और प्रशासनिक लाभ भी हैं। यदि लोग स्थानीय और कम दूरी के कामों के लिए साइकिल का रुख करेंगे, तो:

  • ​मुख्य सड़कों और बाजारों में वाहनों का दबाव (Traffic Pressure) बेहद कम होगा।
  • ​यातायात सुगम होगा और आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आएगी।
  • ​ध्वनि प्रदूषण और पार्किंग जैसी गंभीर समस्याओं से शहरों को बड़ी राहत मिलेगी।

​युवाओं से अपील: सप्ताह में कम से कम दो दिन अपनाएं साइकिल

​नरेंद्र मारवाल ने देश और प्रदेश की युवा पीढ़ी से विशेष अपील करते हुए कहा कि आज युवाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में से सप्ताह में कम से कम दो दिन अपनी बाइक या कार को छोड़कर साइकिल का इस्तेमाल जरूर करें।

​उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नागरिकों का यह छोटा सा व्यक्तिगत प्रयास और आदतों में किया गया यह मामूली बदलाव आने वाले समय में वायु गुणवत्ता (Air Quality) को सुधारने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में एक बहुत बड़ा और मील का पत्थर साबित होने वाला योगदान देगा।

​जेब पर कम होगा बोझ, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगेगा अंकुश

​पर्यावरण और सेहत के फायदों के साथ-साथ मारवाल ने इसके आर्थिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगातार बढ़ रही पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम आदमी के बजट को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में साइकिल न केवल एक बेहतरीन और मुफ्त व्यायाम का साधन है, बल्कि यह ईंधन की खपत को कम कर सीधे तौर पर हमारे पैसे बचाती है। जब बड़े पैमाने पर ईंधन की मांग घटेगी, तो निश्चित रूप से कच्चे तेल के आयात और लगातार बढ़ती घरेलू कीमतों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

​अंत में उन्होंने ‘साइकिल चलाओ, पर्यावरण और सेहत बचाओ’ के नारे के साथ सभी से इस अभियान का हिस्सा बनने का संकल्प दिलाया।

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