बिलासपुर छत्तीसगढ़/ गनपत चौहान
वैश्विक पर्यावरण संकट, उसके निदान और उपायों पर गंभीर विमर्श के लिए प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘जंगल मितान छत्तीसगढ़’ संस्था द्वारा एक गरिमामय संगोष्ठी और वृक्ष उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 5 जून (शुक्रवार) को प्रातः 8:00 बजे से स्थानीय बाजपेयी परिषद, विकास नगर (27 खोली), बिलासपुर में संपन्न होगा।
33 वर्षों की अटूट परंपरा और वृक्ष पूजन
यह आयोजन इसलिए बेहद खास है क्योंकि यह संस्था के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों का 33वां वर्ष है। वर्ष 1994 में संस्था के संस्थापक व पूर्व विधायक चन्द्र प्रकाश बाजपेयी द्वारा रोपे गए औषधीय और छायादार पौधों (जैसे रुद्राक्ष, चंदन, पीपल, हर्रा, बहेड़ा, आंवला, नीम, आम आदि) का इस अवसर पर विधिवत पूजन और उत्सव मनाया जाएगा। आज ये पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं, जो निरंतर प्रकृति को समृद्ध कर रहे हैं।
गंभीर समसामयिक विषयों पर होगा विमर्श
संस्था के अध्यक्ष चन्द्र प्रदीप बाजपेयी और अखिलेश ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष संगोष्ठी का मुख्य विषय “वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौतियां, निदान और उपाय” रखा गया है।
संगोष्ठी के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित उप-विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी:
- संकट के मुख्य कारण: तेजी से बढ़ती जनसंख्या, बेलगाम औद्योगीकरण और अंधाधुंध विकास।
- असंतुलन के भयावह परिणाम: नई-नई बीमारियां, सूखा, बाढ़, लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग), जलस्रोतों का सूखना और खेती पर पड़ने वाला विपरित असर।
- भारतीय संस्कृति और पर्यावरण: भारतीय समाज में पर्यावरण की पारंपरिक अवधारणा और मानवीय जीवन में इसका महत्व।
- निदान और उपाय: भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक उपाय और ठोस निष्कर्ष।
प्रख्यात वक्ता रखेंगे अपने विचार
इस बौद्धिक चर्चा और संगोष्ठी में शहर के प्रबुद्ध जन और पर्यावरण विशेषज्ञ मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- विवेक जोगलेकर
- रुद्र अवस्थी
- डॉ. देवधर महंत
- राजीव नयन शर्मा
- डॉ. शकुंतला जितपुरे
पर्यावरण प्रेमियों से शामिल होने की अपील
जंगल मितान संस्था ने बिलासपुर के सभी पर्यावरणविदों, प्रकृति प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे शुक्रवार सुबह ठीक 8:00 बजे विकास नगर स्थित आयोजन स्थल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पुनीत कार्य का हिस्सा बनें और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को आगे बढ़ाएं।