नरेश गुनानी
भीलवाड़ा, 09 अप्रैल 2026
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) द्वारा मेडिसिटी ग्राउंड, भीलवाड़ा में आयोजित विश्व नवकार महामंत्र दिवस समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने नवकार महामंत्र को भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर बताते हुए समाज को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाया।
नवकार महामंत्र: आत्मशुद्धि और साधना का प्रतीक
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि नवकार महामंत्र किसी व्यक्ति विशेष की प्रशंसा नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, अगाध आस्था और साधना का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि:
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- यह मंत्र मनुष्य को आंतरिक रूप से सशक्त बनाता है।
- यह जीवन के उच्चतर मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
- अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित यह मंत्र विश्व के प्राचीनतम मंत्रों में से एक है।
”वर्तमान वैश्विक अशांति के दौर में नवकार महामंत्र की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। यह मंत्र आध्यात्मिक प्रगति के साथ-साथ समाज में सुरक्षा और समृद्धि का संचार करता है।” — हरिभाऊ बागडे, राज्यपाल
आंतरिक शत्रुओं पर विजय का आह्वान
जैन धर्म की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि तीर्थंकरों ने हमें क्रोध, मोह और द्वेष जैसे आंतरिक शत्रुओं को जीतने का मार्ग दिखाया है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि आत्मोन्नति के लिए इन विकारों का त्याग करना अनिवार्य है।
“जियो और जीने दो” की वैश्विक प्रासंगिकता
समारोह में उपस्थित सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्धों और संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
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- आज की मानवता के लिए भगवान महावीर का “जियो और जीने दो” का सिद्धांत ही एकमात्र समाधान है।
- समाज को हिंसा का मार्ग छोड़कर करुणा और सह-अस्तित्व को अपनाना चाहिए।
