विश्व कैंसर दिवस: शासकीय माध्यमिक शाला लखराम में जागरूकता शिविर आयोजित; 110 विद्यार्थियों को पिलाया औषधीय काढ़ा

विश्व कैंसर दिवस: शासकीय माध्यमिक शाला लखराम में जागरूकता शिविर आयोजित; 110 विद्यार्थियों को पिलाया औषधीय काढ़ा

लखराम (बिलासपुर)।

| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़

विश्व कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में शासकीय माध्यमिक शाला लखराम में स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयुष्मान आरोग्य मंदिर लखराम के सौजन्य से आयोजित इस शिविर में विद्यार्थियों को इस गंभीर बीमारी के प्रति सचेत रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प दिलाया गया।

​आयुर्वेद और योग से कैंसर से बचाव का मंत्र

​कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं प्रभारी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि जितपुरे ने विद्यार्थियों को कैंसर के कारणों, प्रारंभिक लक्षणों और बचाव के वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक उपायों के बारे में विस्तार से समझाया।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: डॉ. जितपुरे ने बताया कि आयुर्वेद की औषधियां शरीर की इम्यून पावर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने दैनिक जीवन में हल्दी, आंवला, त्रिफला और तुलसी जैसी औषधियों के नियमित उपयोग की सलाह दी।
  • योग का अभ्यास: स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में योग प्रशिक्षक रामेश्वर बरगाह ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का व्यावहारिक अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार नियमित योग शरीर को विषाक्त तत्वों से मुक्त रखने में सहायक होता है।
  • फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

​वितरण एवं जागरूकता सामग्री

​जागरूकता अभियान के तहत विद्यालय में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य गतिविधियों का संचालन किया गया:

  • औषधीय वितरण: कार्यक्रम के दौरान कुल 110 विद्यार्थियों को शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाले ‘त्रिकटु सिद्ध बल्य काढ़े’ का वितरण किया गया।
  • साहित्य वितरण: विद्यार्थियों को कैंसर से बचाव संबंधी जानकारी से युक्त जागरूकता पम्पलेट बांटे गए, ताकि वे अपने परिवार और समाज को भी इस बारे में शिक्षित कर सकें।

​सामूहिक सहयोग से सफल आयोजन

​इस शिविर के सफल क्रियान्वयन में विद्यालय के प्राचार्य बलराम विश्वकर्मा सहित शिक्षिका अनीता गुप्ता, रूपांजलि तिवारी और निशा गुप्ता का विशेष योगदान रहा। साथ ही औषधालय लखराम के समस्त कर्मचारी गण ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में सहयोग प्रदान किया।

​”कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। आयुर्वेद और योग के समावेश से हम न केवल इस बीमारी से बच सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण भी कर सकते हैं।”

डॉ. रश्मि जितपुरे

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