विशेष योग्यजनों के जीवन को सुगम बनाएंगे अत्याधुनिक कृत्रिम अंग: राजस्थान सरकार की अनूठी पहल
जयपुर | 07 जनवरी, 2026
| नरेश गुनानी
राजस्थान सरकार विशेष योग्यजनों (दिव्यांगजनों) को और अधिक स्वावलंबी और सशक्त बनाने के लिए कृत्रिम अंगों एवं उपकरणों की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने बुधवार को अम्बेडकर भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न शोध संस्थानों और संगठनों द्वारा तैयार किए गए अत्याधुनिक उपकरणों के प्रस्तुतिकरण देखे।
बजट घोषणा 2025-26 की अनुपालना में नवाचार
मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में विशेष योग्यजनों के लिए आर्टिफिशियल लिंब्स (कृत्रिम अंग) और इक्यूपमेंट की गुणवत्ता सुधारने हेतु शोध करने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। इसी की अनुपालना में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों और शोध संस्थानों से ‘अभिरुचि की अभिव्यक्ति’ (EOI) आमंत्रित की गई थी।
हल्का, किफायती और सुविधाजनक बनाने पर जोर
बैठक के दौरान मंत्री ने शोध संस्थाओं को महत्वपूर्ण सुझाव दिए और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया:
- वजन में कमी: कृत्रिम अंगों को और अधिक हल्का बनाया जाए ताकि उन्हें पहनकर चलने-फिरने में थकान न हो।
- किफायती तकनीक: अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उपकरणों को आमजन की पहुंच में रखा जाए।
- सहज उपयोग: उपकरण ऐसे हों जो दैनिक कार्यों में सहजता प्रदान करें और दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को बढ़ाएं।
राजस्थान: संवेदनशीलता में अग्रणी राज्य
अविनाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जो सरकारी स्तर पर विशेष योग्यजनों के उपकरणों के शोध और विकास (R&D) पर इतनी गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये नवाचार दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन जीने में मील का पत्थर साबित होंगे।
बैठक में शामिल प्रमुख संस्थान और अधिकारी
इस प्रस्तुतिकरण में महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर फुट) सहित कई नामी कंपनियों और विशेषज्ञों ने अपने सुझाव रखे। बैठक में विशेष योग्यजन निदेशालय के आयुक्त इकबाल खान, अतिरिक्त निदेशक चंद्रशेखर चौधरी और निजी सचिव रोहित कुमार सहित डॉ. वैभव भंडारी, डॉ. अमित नाटाणी और अन्य विभागीय अधिकारी व विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु: एक नजर में
- उद्देश्य: विशेष योग्यजनों को उच्च गुणवत्ता वाले और आधुनिक उपकरण प्रदान करना।
- प्रक्रिया: सरकारी और गैर-सरकारी शोध संस्थानों से नवीन तकनीक के सुझाव मांगे गए।
- महत्व: उपकरणों में सुधार से दिव्यांगजनों की कार्यक्षमता और सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी।