विलायती बबूल के संपूर्ण उन्मूलन के लिए बनेगी चरणबद्ध कार्य योजना, विभागों के समन्वय से चलेगा महाअभियान

नरेश गुनानी 

जयपुर, 23 मई 2026: राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता को बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शासन सचिवालय स्थित पंचायती राज सभागार में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में विलायती बबूल (जूलिफ्लोरा) के संपूर्ण उन्मूलन को लेकर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में वन मंत्री संजय शर्मा और पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी भी उपस्थित रहे।

​जैव विविधता और जल संरक्षण के लिए उन्मूलन जरूरी

​बैठक को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विलायती बबूल को हटाने के लिए एक ठोस और चरणबद्ध कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने इसके वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा:

  • स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान: विलायती बबूल एक बाहरी प्रजाति है जो अपने आसपास किसी अन्य स्थानीय वनस्पति या पौधे को पनपने नहीं देती।
  • भूजल का अत्यधिक दोहन: इस विदेशी बबूल की जड़ें जमीन में 10 मीटर की गहराई तक फैल जाती हैं, जिससे यह अत्यधिक पानी सोखता है और भूजल स्तर को तेजी से गिराता है।
  • पर्यावरणीय असंतुलन: इसके तेजी से फैलने के कारण राजस्थान की मूल जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

​आर्थिक उपयोग: लकड़ी से कोयला बनाने का बनेगा ‘ऑक्शन प्लान’

​मदन दिलावर ने केवल बबूल काटने तक ही सीमित न रहकर इसके आर्थिक प्रबंधन पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विलायती बबूल को हटाने के लिए आवश्यक गाइडलाइंस तैयार की जाएं। साथ ही, इससे कटने वाली लकड़ी से कोयला बनाने के लिए एक प्रभावी ऑक्शन प्लान (नीलामी योजना) तैयार किया जाए, जिससे राज्य को राजस्व भी मिल सके।

​”राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्रजातियों के संवर्धन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विलायती बबूल जैसी हानिकारक प्रजातियों के उन्मूलन के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वय के साथ एक व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जाएगा।”

मदन दिलावर, पंचायती राज मंत्री

 

​परिवहन और टीपी (Transit Permit) की समस्या का समाधान

​बैठक के दौरान वन मंत्री संजय शर्मा ने बबूल की लकड़ी से बने कोयले के परिवहन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोयले के परिवहन में टीपी (ट्रांजिट परमिट) की कोई समस्या आती है, तो इसके लिए भारत सरकार का NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) पोर्टल उपलब्ध है। इस डिजिटल पोर्टल के माध्यम से टीपी जारी की जाती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बनेगी।

​विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों का मिला तकनीकी सहयोग

​इस महाअभियान को धरातल पर उतारने के लिए बैठक में कई विभागों के प्रशासनिक और तकनीकी प्रमुखों ने हिस्सा लिया। सभी ने अभियान की क्षेत्रवार रणनीति और तकनीकी पहलुओं पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:

  • अरिजीत बनर्जी (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स)
  • डॉ. जोगाराम (शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज)
  • ​राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
  • ​ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी

​इस समन्वय बैठक के बाद अब जल्द ही प्रदेश में जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर विलायती बबूल को जड़ से उखाड़ने और उसकी जगह स्थानीय व उपयोगी पौधे लगाने के अभियान की शुरुआत की जाएगी।

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