जयपुर। योगेश शर्मा
भारतीय संस्कृति, परंपरा और नारी गौरव के प्रतीक ‘साड़ी’ को आधुनिक पीढ़ी के बीच बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुलाबी नगरी में एक अनूठा और भव्य रैंप शो आयोजित किया गया। टोंक रोड स्थित मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स शोरूम में चेरिशिंग रूट्स फाउंडेशन एवं भारतीय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में ‘वॉक इन साड़ी – सीजन 1’ का सफल आयोजन संपन्न हुआ। इस फैशन रनवे की खास बात यह रही कि इसमें 13 वर्ष की किशोरियों से लेकर 75 वर्ष तक की बुजुर्ग महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ साड़ी पहनकर कैटवॉक किया और भारतीय परिधान का गौरव बढ़ाया।
गणेश वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि बसंत जैन बैराठी, डॉ. रमा दत्त, मुख्य आयोजक अमृता सक्सेना, प्रियंका गोयल, वंशिता सक्सेना और वान्या सक्सेना ने भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद रंग-बिरंगी और पारंपरिक साड़ियों में सजी संवरीं महिला प्रतिभागियों ने मंच पर कदम रखा, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दिग्गज हस्तियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
मुख्य आयोजक अमृता सक्सेना ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट बोर्ड (देवस्थान विभाग, राज सरकार) के पूर्व सदस्य, भारत वर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सरस्वती प्रिंटिंग ग्रुप के चेयरमैन बसंत जैन बैराठी उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथियों में सिटी पैलेस की एग्जीक्यूटिव ट्रस्टी डॉ. रमा दत्त, प्रकृति फाउंडेशन की प्रियंका गोयल, दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप ‘विराट’ की सचिव स्वगृही माओ, डेंजिल नेजरत, सबिता नायर, यशवर्धिनी चौहान, स्थानीय पार्षद जय वशिष्ठ, समीक्षा जैन, एडवोकेट संजय बाहेती, शिव कुमार शर्मा (मीडिया पार्टनर) एवं नरेंद्र उपाध्याय ने शिरकत कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
निर्णायक मंडल और सहयोगी प्रायोजक
प्रतियोगिता को निष्पक्ष रूप से परखने के लिए निर्णायक मंडल (ज्यूरी) में राहुल शर्मा, माधुरी कुमार, सरस्वती प्रिंटिंग इंडस्ट्रीज की ब्रांड एंबेसडर जया मानरल, वैष्णवी सुथार एवं सुशीला सारस्वत शामिल रहीं।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, लंदन बेरी गोपाल फैब्रिक, ए.जी. ज्वेल्स, ‘बेटी एक मुस्कान’ और मिस लंदन बाइट्स ने बतौर स्पॉन्सर्स (प्रायोजक) अहम भूमिका निभाई। सरस्वती प्रिंटिंग द्वारा आकर्षक ट्रॉफी और सर्टिफिकेट्स की व्यवस्था की गई।
रैंप पर चमकीं विजेता दीवा, मिला खास सम्मान
चेरिशिंग रूट्स फाउंडेशन की फाउंडर वंशिता सक्सेना ने विभिन्न श्रेणियों के परिणामों की घोषणा की। प्रतियोगिता के मुख्य विजेताओं की सूची इस प्रकार रही:
- राइजिंग दीवा विनर: चक्रिका वार्ष्णेय
- रियल रेडियंस विनर: सोनाली राठौर
- टाइमलेस ब्यूटी विनर: डॉ. अनीता परिहार
- गोल्डन ग्रेस विनर: सुनीता शर्मा
इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लक्षिता शर्मा, कमलेश शर्मा, नूतन शर्मा, प्रतिभा मिश्रा, सावित्री शर्मा, पूजा शर्मा, पुष्पा माहेश्वरी, हेमलता चौहान, लता तिवारी को भी विजेता घोषित किया गया। प्रत्येक श्रेणी के विजेताओं को क्राउन (ताज), ट्रॉफी एवं सिल्वर नोट देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सर्वाधिक महिलाओं की एंट्री करवाने के लिए संतोष मिश्रा को विशेष सम्मान से नवाजा गया।
मदर्स डे विशेष प्रतियोगिता के नतीजे और ‘लहरिया उत्सव’ का ऐलान
आयोजन के दौरान ही मदर्स डे के उपलक्ष्य में आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता “माँ : एक पुनर्जन्म” के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इसमें मीनू भारद्वाज, बेबी जैन, मीना गोखलानी, डॉ. वर्षा लता, स्वर्ण लता दाधीच और लता तिवारी विजेता रहीं।
इस अवसर पर दोनों संस्थाओं के पदाधिकारियों और अतिथियों ने राजस्थान के पारंपरिक श्रावणी पर्व से जुड़े आगामी कार्यक्रम ‘लहरिया उत्सव’ के खूबसूरत पोस्टर का विमोचन भी किया।
साड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं, स्त्री का आत्मसम्मान और माँ का आँचल है: अमृता सक्सेना
भारतीय संस्था की संस्थापिका अमृता सक्सेना ने कार्यक्रम के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए भावुक संदेश दिया।
”वॉक इन साड़ी कार्यक्रम का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी में साड़ी के प्रति आकर्षण को दोबारा जीवित करना और हमारे पारंपरिक परिधान को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करना है। साड़ी केवल छह गज कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह माँ का आँचल है। यह हमारी समृद्ध संस्कृति, एक भारतीय स्त्री का गौरव, उसका आत्मविश्वास और उसका आत्मसम्मान है।”
— अमृता सक्सेना, संस्थापिका, भारतीय संस्था
इनकी रही सराहनीय भूमिका
समारोह को सफलतापूर्वक मंच पर उतारने में भारतीय संस्था से संस्थापिका अमृता सक्सेना, सदस्य रागिनी शर्मा व श्रेष्ठ बरोड़िया तथा चेरिशिंग रूट्स फाउंडेशन की ओर से संस्थापिका वंशिता सक्सेना, को-फाउंडर प्रदीप फागवानी और कोषाध्यक्ष वान्या सक्सेना ने व्यवस्थाओं व रूपरेखा को अंतिम रूप देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।