नरेश गुनानी
जयपुर | 18 अप्रैल, 2026
राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि कानून निर्माण की प्रक्रिया में विधायी मसौदा (Legislative Drafting) सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मसौदे की भाषा इतनी स्पष्ट और सरल होनी चाहिए कि उसमें आम जनता की आकांक्षाएं और इच्छाएं स्पष्ट रूप से झलकें।
शनिवार को गुलाबी शहर के ‘गुलाबी सदन’ (राजस्थान विधान सभा) में आयोजित 37वें अंतर्राष्ट्रीय विधायी मसौदा प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवनानी ने विदेशी प्रतिभागियों को जनहित में विधायिका की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।

लोकतंत्र का मंदिर और 75 वर्षों का गौरवमयी सफर
देवनानी ने विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थान विधान सभा अपनी स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रही है। राज्य के गठन से लेकर आज के डिजिटल युग तक, इस सदन ने लाखों लोगों के सपनों को कानूनी रूप दिया है। उन्होंने कहा:
”200 सदस्यों वाली यह विधान सभा जनता की इच्छाओं को प्रतिबिंबित करने का सशक्त माध्यम है। भारत अब अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष (2047) की ओर ‘अमृतकाल’ के मार्ग पर अग्रसर है, जो आत्म-निरीक्षण और बड़े लक्ष्यों को निर्धारित करने का समय है।”
कानून निर्माण: सावधानी और पारदर्शिता का संगम
विधायी प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि राजस्थान विधान सभा में कानून बनाने की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी है। उन्होंने इसके तीन मुख्य चरणों का उल्लेख किया:
- प्रथम चरण: सदन में विधेयक का प्रस्तुतीकरण।
- द्वितीय चरण: गहन चर्चा और विशेष समितियों द्वारा मसौदे का बारीकी से विश्लेषण।
- तृतीय चरण: सदन द्वारा मतदान और अनुमोदन।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्ट और सरल भाषा ही वास्तव में ‘न्याय का सार’ है, क्योंकि जब कानून समझने में आसान होता है, तभी वह सही मायने में जनता के काम आता है।
डिजिटल शासन और आधुनिक संग्रहालय
विधान सभा की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए देवनानी ने कहा कि सदन ने अपने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटल कर दिया है। यह कदम केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन में गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने विधान सभा में बने आधुनिक डिजिटल संग्रहालय को जनता और विशेषकर युवाओं से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।
अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता और अनुभव साझाकरण
इस कार्यक्रम में बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया और जाम्बिया सहित 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। देवनानी ने प्रतिभागियों से कहा कि वरिष्ठ विधायकों के साथ यह चर्चा उनके विधायी ज्ञान को बढ़ाएगी। उन्होंने ‘पधारो म्हारे देश’ की भावना के साथ मेहमानों का अभिवादन किया।
कार्यक्रम में उपस्थिति:
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान, विधायक डॉ. गोपाल शर्मा, चंद्रभान सिंह आक्या, कैलाश वर्मा, गुरवीर सिंह, डॉ. शिखा मील बराला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। विधान सभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा और लोकसभा के प्राइड कार्यक्रम के निदेशक राजकुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। अंत में भूटान की विधायी अधिकारी सुश्री फूर्पा डेमा ने आभार व्यक्त किया।