नरेश गुनानी
- स्पीकर वासुदेव देवनानी के ढाई साल के कार्यकाल में राजस्थान विधान सभा ने किए अनेक ऐतिहासिक नवाचार
- सोमवार 18 मई को राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में आयोजित होगा भव्य समारोह
- देश की सर्वश्रेष्ठ विधान सभा के रूप में उभरी: यूट्यूब चैनल पर होगा कार्यक्रम का सजीव (लाइव) प्रसारण
- गुलाबी थीम पर सजा सदन, पेपरलेस व्यवस्था और डिजिटल गैलरी से मिली राजस्थान विधान सभा को नई पहचान
जयपुर, 16 मई 2026
राजस्थान विधान सभा अपनी स्थापना के 75वें वर्ष (हीरक जयंती) के उपलक्ष्य में एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने जा रही है। इस विशेष अवसर पर विधान सभा के नए प्रतीक चिन्ह (लोगो) का विमोचन किया जाएगा और साथ ही विधान सभा भवन के ऐतिहासिक द्वारों के नामकरण की पट्टिकाओं का अनावरण भी होगा। यह गरिमामयी समारोह सोमवार, 18 मई 2026 को प्रातः 10:30 बजे विधान सभा के विधायक कक्ष में आयोजित किया जाएगा।
भव्य समारोह में जुटेंगे सूबे के दिग्गज, यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण
विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल सहित सभी विधायक गणों को आमंत्रित किया गया है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से आमजन को जोड़ने के उद्देश्य से इस पूरे कार्यक्रम का सजीव (लाइव) प्रसारण राजस्थान विधान सभा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल @Rajasthan Vidhan Sabha पर किया जाएगा।
स्पीकर वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में देश की सर्वश्रेष्ठ विधान सभा बनी
सोलहवीं राजस्थान विधान सभा के स्पीकर वासुदेव देवनानी ने अपने ढाई वर्षों के कार्यकाल में बेहतरीन पहल करते हुए नवाचारों की एक अनूठी श्रंखला खड़ी कर दी है। इन दूरदर्शी प्रयासों के चलते राजस्थान विधान सभा ने न केवल देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, बल्कि यह देश की सर्वश्रेष्ठ विधान सभा के रूप में भी उभरी है।
विधान सभा के कायाकल्प और नवाचारों की लंबी फेहरिस्त
गत ढाई वर्षों में राजस्थान विधान सभा के स्वरूप और कार्यप्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- गुलाबी नगर के रंग में रंगा सदन: जयपुर की ऐतिहासिक पहचान ‘गुलाबी नगरी’ के अनुरूप विधान सभा सदन के आंतरिक स्वरूप में बदलाव कर उसे गुलाबी रंग की थीम पर तैयार किया गया है।
- डिजिटल और पेपरलेस कार्यप्रणाली: पर्यावरण संरक्षण और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए विधान सभा की व्यवस्थाओं को डिजिटल एवं पेपरलेस किया गया है। विधायकों की ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था भी शुरू की गई है।
- सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक दीर्घाएं: आमजन और युवा पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने के लिए विधान सभा में डिजिटल संग्रहालय, संविधान दीर्घा, वंदेमातरम दीर्घा और शौर्य वाटिका का निर्माण किया गया है।
- पर्यावरण संरक्षण: परिसर को हरा-भरा और स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका स्थापित की गई हैं।
- सदन की उत्पादकता में वृद्धि: विधान सभा सदन में चर्चा का समय बढ़ाया गया है और जवाबदेही तय करने के लिए ‘उत्तरदायित्व की प्रश्नोत्तरी’ जैसी शुरुआत की गई है।
- सुरक्षा और संवाद के नए केंद्र: विधान सभा की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। साथ ही वैचारिक आदान-प्रदान के लिए सेन्ट्रल हॉल की परिकल्पना को साकार किया गया है और कॉन्स्टिटयूशन क्लब को विचार-विमर्श का प्रमुख केंद्र बनाया गया है।
- जन-भागीदारी: आम लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से सीधे जोड़ने के लिए ‘जनदर्शन कार्यक्रम’ शुरू किया गया। इसके अलावा सोशल मीडिया इन्फ्लुएसर्स मीट और महिला दिवस जैसे विशेष आयोजनों ने विधान सभा को एक नया और आधुनिक कलेवर दिया है।
18 मई को होने वाला यह लोगो विमोचन और द्वारों का नामकरण समारोह राजस्थान विधान सभा के इसी गौरवशाली सफर में एक और नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगा।